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    ईरान पर US-इजरायल के हमले से दुनिया में खलबली… यूरोप ने बुलाई आपात बैठक, रूस-चीन ने की निंदा

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    ईरान पर US-इजरायल के हमले से दुनिया में खलबली… यूरोप ने बुलाई आपात बैठक, रूस-चीन ने की निंदा


    अमेरिका और इजराइल द्वारा शनिवार को ईरान पर किए गए हमलों के बाद दुनिया भर के देशों की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. कई देशों ने व्यापक संघर्ष की आशंका जताई. यूरोपीय नेताओं ने आपात बैठकें कीं और मध्य पूर्व में अपने नागरिकों की सुरक्षा के उपाय किए. कई प्रमुख नेताओं ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत से समाधान निकालने की अपील की. वहीं ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने हमलों के प्रति अपेक्षाकृत खुला समर्थन जताया, जबकि रूस और चीन ने आलोचना की. आइए जानते हैं इस युद्ध पर किस देश ने क्या कहा?

    यूरोपीय देशों की बातचीत पर जोर
    ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता फिर शुरू करने की मांग की और क्षेत्र के देशों पर ईरानी हमलों की निंदा की, लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका-इजरायल के हमलों पर टिप्पणी नहीं की. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने संयुक्त बयान में कहा कि उनके देश इन हमलों में शामिल नहीं थे, लेकिन वे अमेरिका, इजरायल और क्षेत्रीय साझेदारों के संपर्क में हैं.

    तीनों देशों ने कहा, ‘हम क्षेत्र के देशों पर ईरानी हमलों की कड़ी निंदा करते हैं. ईरान को अंधाधुंध सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए. हम वार्ता फिर शुरू करने की अपील करते हैं और ईरानी नेतृत्व से बातचीत के जरिए समाधान खोजने का आग्रह करते हैं.’

    भारत ने इजरायल और ईरान से की बात
    भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हमलों के बीच ईरान और इजरायल के नेताओं से बात की. उन्होंने X पर कहा, आज शाम ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ बातचीत हुई. हाल के घटनाक्रम पर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की. अपने दूसरी पोस्ट में उन्होंने कहा, आज दोपहर इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार से बात की. हमने तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी की भारत की अपील दोहराई.

    वॉशिंगटन के सहयोगियों के सामने दुविधा
    ईरान पर हमलों ने अमेरिका के सहयोगियों के सामने दुविधा पैदा कर दी है. यूरोपीय नेता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सख्त धार्मिक शासन की कार्रवाइयों का विरोध करते हैं, लेकिन वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने से हिचक रहे हैं, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और बड़े संघर्ष का खतरा हो सकता है. ट्रंप के पिछले जून में ईरान पर हमले और पिछले महीने वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने भी ऐसी ही स्थिति पैदा की थी.

    रूस और चीन की कड़ी आलोचना
    रूस के विदेश मंत्रालय ने हमलों को ‘पूर्व नियोजित और बिना उकसावे की सशस्त्र आक्रामकता’ बताया और अमेरिका व तेल अवीव पर आरोप लगाया कि वे परमाणु कार्यक्रम की चिंता के पीछे ‘शासन परिवर्तन’ का एजेंडा छिपा रहे हैं. चीन ने भी गहरी चिंता जताते हुए सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और वार्ता पर लौटने की अपील की. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए.

    जर्मनी और फ्रांस ने क्या कहा?
    यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका के सहयोगियों को हमलों की पहले से जानकारी थी या नहीं. जर्मनी ने कहा कि उसे शनिवार सुबह ही सूचना मिली, जबकि फ्रांस के एक जूनियर रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें अंदेशा था लेकिन समय नहीं पता था. शनिवार को मैक्रों ने हमलों के जवाब में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की. उन्होंने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का असर वैश्विक शांति और सुरक्षा पर गंभीर होगा.

    ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सरकार की आपात समिति की बैठक की अध्यक्षता की और कहा गया कि ब्रिटेन व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं चाहता. NATO की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा कि नाटो ईरान और क्षेत्र के घटनाक्रम पर नजर रख रहा है.

    ऑस्ट्रेलिया और कनाडा का समर्थन
    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा कि उनका देश ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोकने के अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करता है. उन्होंने ईरान के मौजूदा नेतृत्व को अस्थिर करने वाली ताकत बताया. ऑस्ट्रेलिया ने अगस्त में ईरान से राजनयिक संबंध भी तोड़ दिए थे. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान मध्य पूर्व में अस्थिरता और आतंक का मुख्य स्रोत है.

    तुर्की के राष्ट्रपति क्या बोले?
    लंबे समय से हमने यह पक्का करने की पूरी कोशिश की कि बातचीत के जरिए मतभेदों को बातचीत की टेबल पर सुलझाया जाए। हमारे इलाके के दूसरे देशों ने भी इसी तरह पूरी कोशिश की। लेकिन, जो नतीजा चाहिए था, वह नहीं मिल सका, क्योंकि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी को दूर नहीं किया जा सका और इजरायल ने इस प्रोसेस को कमजोर करने की अपनी कोशिशें जारी रखीं।

    यूरोपीय संघ ने कूटनीति की अपील की
    यूरोपीय संघ की शीर्ष राजनयिक काजा कल्लास ने मध्य पूर्व की स्थिति को ‘खतरनाक’ बताया और कहा कि वह इजरायली और अरब अधिकारियों के साथ बातचीत के जरिए समाधान तलाश रही हैं. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने संयुक्त बयान में सभी पक्षों से संयम बरतने, नागरिकों की सुरक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की.

    नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने आशंका जताई कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल रही तो मध्य पूर्व में ‘नया और व्यापक युद्ध’ हो सकता है.

    हमलों की तीखी आलोचना
    नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संगठन परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान ने अमेरिका-इजरायल हमलों की कड़ी निंदा की. इसकी कार्यकारी निदेशक मेलिसा पार्के ने कहा, ‘ये हमले पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं और इससे तनाव बढ़ने के साथ परमाणु प्रसार का खतरा भी बढ़ता है.’

    मलेशिया के प्रधानमंत्री ने की निंदा
    मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी इजरायल के हमलों और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि बढ़ता संघर्ष मध्य पूर्व को ‘तबाही के किनारे’ पर ले गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बात में ईरान पर ‘अनुचित हमलों’ की निंदा की.

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