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    केवल अभ‍िषेक शर्मा ही नहीं, त‍िलक वर्मा भी उतने ही कसूरवार, संजू सैमसन से टीम इंड‍िया के मैनेजमेंट को क्या द‍िक्कत?

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    केवल अभ‍िषेक शर्मा ही नहीं, त‍िलक वर्मा भी उतने ही कसूरवार, संजू सैमसन से टीम इंड‍िया के मैनेजमेंट को क्या द‍िक्कत?


    टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 में पहुंचते-पहुंचते भारतीय बल्लेबाजी की सबसे बड़ी चिंता टॉप ऑर्डर बन गया है. जहां एक ओर अभ‍िषेक शर्मा लगातार शुरुआत देने में नाकाम रहे हैं, वहीं शुरुआती झटकों के बाद पारी संभालने की जिम्मेदारी उठाने वाले त‍िलक वर्मा भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं.

    पांच पारियों में तिलक ने 107 रन बनाए हैं. औसत 21.40 और स्ट्राइक रेट 118.88, ये आंकड़े टी20 के उस नंबर 3 के बल्लेबाज के लिए कमजोर हैं जिसे आज के दौर में सबसे अहम माना जाता है. 

    भारत के पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर ने तिलक की बल्लेबाजी सोच पर खुलकर निराशा जताई.उन्होंने कहा कि विकेट गिरने के बाद बल्लेबाज का काम आक्रामकता नहीं, साझेदारी बनाना होता है. अफ्रीका के ख‍िलाफ रनरेट 9.5 था, 15 नहीं. ऐसे में समय लेकर पारी को स्थिर किया जा सकता था.गावस्कर का मानना रहा कि 55 रन का पावरप्ले भी टीम के लिए 

    साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में तिलक का आउट होना चिंता और बढ़ाने वाला रहा. उन्होंने दूसरे ही गेंद पर मार्को जानसे के खिलाफ आगे बढ़कर शॉट खेलने की कोशिश की और एज दे बैठे. यह शॉट उनकी स्वाभाविक शैली से अलग लगा, मानो टीम के आक्रामक टेम्पलेट में फिट होने की कोशिश ने उनकी सहजता छीन ली हो.

    अभ‍िषेक शर्मा को टीम ढो रही
    सुपर-8 के पहले मुकाबले में 76 रन की करारी हार ने भारत के अभियान को झटका दिया है. अभिषेक शर्मा की लगातार विफलता और टॉप ऑर्डर की कमजोर शुरुआत ने टीम की आक्रामक रणनीति को बेअसर बना दिया. विरोधी टीमों ने भारत की बल्लेबाजी की कमजोरी पहचान ली है, जिससे आगे का सफर चुनौतीपूर्ण हो गया है.

    अभ‍िषेक  का बल्ला पूरे टूर्नामेंट में खामोश रहा है. चार पारियों में वह सिर्फ 15 रन ही बना सके हैं, आंकड़ा बताता है कि शुरुआत ही भारत की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है. टूर्नामेंट के पहले मैच में अमेर‍िका के खिलाफ वह शून्य पर आउट हुए. विरोधियों ने उनकी पसंदीदा डीप एक्स्ट्रा-कवर क्षेत्र में फील्डर लगाकर साफ संदेश दे दिया कि तैयारी पूरी है.

    अगले मैच से पहले उन्हें पेट संक्रमण के कारण नामीब‍िया के खिलाफ मुकाबले से बाहर होना पड़ा.वापसी पाकिस्तान के खिलाफ हुई, लेकिन स्पिन के सामने वह फिर टिक नहीं सके और पहले ही ओवर में आउट हो गए.

    नीदरलैंड्स के खिलाफ भी हालात नहीं बदले. शुरुआती ओवर में ही उनका विकेट गिर गया, जिससे भारत फिर दबाव में आ गया. साफ दिखने लगा कि विरोधी टीमों ने भारत के टॉप ऑर्डर के खिलाफ एक तय खाका बना लिया है, नई गेंद, स्पिन का जल्दी इस्तेमाल और ओपनर्स को जाल में फंसाना.

    साउथ अफ्रीका के खिलाफ अभिषेक ने आखिरकार टूर्नामेंट में अपना खाता खोला, लेकिन वह लय नहीं पकड़ सके. 12 गेंदों पर 15 रन बनाकर वह मार्को जानसेन की धीमी गेंद पर चकमा खा बैठे. यह पारी भी उस आत्मविश्वास की झलक नहीं दे सकी जिसकी टीम को जरूरत थी.

    दुनिया के नंबर-1 टी20I बल्लेबाज के रूप में आए अभिषेक का यह टूर्नामेंट अब तक निराशाजनक रहा है. उनकी विफलता ने सिर्फ व्यक्तिगत फॉर्म नहीं, बल्कि पूरी भारतीय बल्लेबाजी की संरचना को प्रभावित किया है. तेज शुरुआत का मॉडल ढहते ही मध्यक्रम लगातार दबाव में आ गया.

    लेफ्ट-हैंड कॉम्बिनेशन बना विरोधियों का हथियार
    भारत का टॉप ऑर्डर तीन बाएं हाथ के बल्लेबाजों से भरा होने के कारण विपक्षी टीमों को मैच-अप सेट करने में आसानी मिल रही है. स्पिनरों को जल्दी लाना, एंगल बनाना और दबाव तैयार करना अब विरोधियों की तय रणनीति बन चुकी है.
    पावरप्ले में स्पिन के खिलाफ संघर्ष ने इस कमजोरी को और उजागर किया है. पाकिस्तान ने जहां सलमान आगा से स्प‍िन बॉल‍िंग करवाई, वहीं एडेन मार्करम ने भारत के ख‍िलाफ गेंदबाजी की, खास बात रही कि इन दोनों ने ही भारत को तब पहले ओवर में झटके द‍िए. आगा ने जहां अभ‍िषेक शर्मा को आउट किया, वहीं मार्करम ने ईशान किशन को आउट किया. 

    क्या संजू की एंट्री से बदलेगा संतुलन?
    टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशचे अफ्रीका के ख‍िलाफ मैच कॉन्फ्रेंस ने भी चयन को लेकर संकेत दिए. उन्होंने सवाल रखा कि क्या टीम पिछले 18 महीनों के प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखे या फिर संजू सैमसन को शामिल कर दाएं-बाएं संतुलन बनाया जाए.उनके मुताबिक यह फैसला अगले दो अहम मैचों से पहले चर्चा का बड़ा विषय रहेगा. संजू ने इस वर्ल्ड कप में महज एक मैच खेला और 22 रनों की नामीब‍िया के ख‍िलाफ ताबड़तोड़ पारी खेली. 

    T20 वर्ल्ड कप के निर्णायक दौर में पहुंचकर भारत के पास प्रयोग का समय नहीं, बल्कि सही फैसले का समय है. अगर टीम ने भूमिका, संयोजन और मैच-अवेयरनेस में बदलाव नहीं किया, तो मामूली सुधार भी अभियान को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा.अब अगला चयन, महज प्लेइंग इलेवन नहीं, पूरे टूर्नामेंट की दिशा तय कर सकता है.

     

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