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    पर्दे पर बने थे CM, असल जिंदगी में मिला ऑफर, अनिल कपूर ने क्यों किया था रिजेक्ट?

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    पर्दे पर बने थे CM, असल जिंदगी में मिला ऑफर, अनिल कपूर ने क्यों किया था रिजेक्ट?


    नायक: द रियल हीरो फिल्म अनिल कपूर के लंबे और शानदार करियर की सबसे यादगार फिल्मों में से एक है. इसे एस शंकर ने डायरेक्ट किया था. इस फिल्म में अनिल कपूर ने शिवाजी राव का किरदार निभाया था. वो एक कैमरापर्सन हैं लेकिन एक दिन के लिए महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनता है. हाल ही में अनिल कपूर ने बताया कि इस फिल्म के लिए उन्होंने काफी वर्कशॉप्स की थीं. फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ राजनीतिक दलों ने उनसे संपर्क भी किया था.

    इंडियन एक्सप्रेस हिंदी से बातचीत में अनिल कपूर ने कहा- मैं हमेशा खुद को एक विद्यार्थी मानता हूं. मैं एक अभिनेता के रूप में आगे बढ़ना चाहता हूं. मुझे लगता है कि हमेशा कोई न कोई मुझसे बेहतर जानता है.

    उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त और थिएटर निर्देशक फिरोज अब्बास खान से इस फिल्म के लिए वर्कशॉप करने की बात की. वो माहिम स्थित उनके ऑफिस में जाकर कई वर्कशॉप और रिहर्सल किया करते थे. अनिल ने कहा कि उन्होंने अब तक साथ में कोई नाटक नहीं किया है. लेकिन यह उनकी इच्छा सूची में है और उम्मीद है कि एक दिन वे ‘नायक’ से भी बड़ा कुछ साथ करेंगे.

    राजनीति में आने का मिला ऑफर

    फिल्म में उनके दमदार अभिनय के बाद कुछ राजनीतिक पार्टियों ने उनसे कॉन्टैक्ट किया. इस पर अनिल ने कहा, “कुछ बातचीत हुई थी, लेकिन मैंने वहीं बात खत्म कर दी. ऐसी पेशकश सीधे नहीं आती, किसी और के जरिए आती है. सामने वाले को भी अंदाजा हो जाता है कि मैं इस काम के लिए इच्छुक नहीं हूं.”

    उन्होंने आगे कहा, “अगर मैं कुछ करूं तो पूरी ईमानदारी और लगन से करूं. लेकिन मेरे अंदर राजनीति के लिए पूरी कमिटमेंट देने की इच्छा नहीं है. मैं जो भी करता हूं, उसमें 100 प्रतिशत देना चाहता हूं.”

    यूनाइटेड नेशन का ठुकराया ऑफर

    अनिल कपूर ने यह भी बताया कि जब स्लमडॉह मिलियनेयर रिलीज हुई और उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, तब संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया.

    उन्होंने कहा, “मैं इसे सिर्फ फोटो खिंचवाने का मौका नहीं बनाना चाहता था. चार तस्वीरें खिंचवा लीं और फिर कुछ न किया, ऐसा नहीं करना चाहता था. अगर करूंगा तो पूरी लगन से करूंगा. लेकिन उस समय मेरी और भी कई प्रायोरिटीज थीं, इसलिए मैंने मना कर दिया. मुझसे बेहतर लोग हैं जो राज्यसभा और लोकसभा में जाने के हकदार हैं.”

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