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    बच गई इरफान सुल्तानी की जान? ट्रंप का दावा- ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं थमीं

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    बच गई इरफान सुल्तानी की जान? ट्रंप का दावा- ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं थमीं


    ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर थोड़े ठंडे पड़ते दिख रहे हैं. बुधवार को उन्होंने कहा कि विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना रोक दी है. हालांकि, तेहरान की तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है. उल्टा वह प्रदर्शन को दबाने के लिए फास्ट ट्रैक ट्रायल और कठोर सजा देने की रणनीति अपना रहा है.

    ट्रंप ने कहा, ‘हमें बताया गया है कि ईरान में हत्याएं रुक रही हैं, रुक चुकी हैं.’ वह आगे बोले, ‘और फांसी की कोई योजना नहीं है, न ही किसी को फांसी दी जाएगी – मुझे यह विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है.’

    राष्ट्रपति की टिप्पणियों में ज्यादा जानकारी नहीं थी. साथ ही वो ईरानी अधिकारियों के सार्वजनिक संकेतों के विपरीत थीं, जिन्होंने देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी रहने के कारण फास्ट ट्रैक ट्रायल और संभावित फांसी की चेतावनी दी है.

    ट्रम्प ने बार-बार ईरानियों को सीधे संबोधित करने की कोशिश की है, प्रदर्शनकारियों से कहा है कि ‘मदद आ रही है’ और संकेत दिया है कि उनका प्रशासन तेहरान की कार्रवाइयों के जवाब में ‘उचित कार्रवाई करेगा’. हालांकि, बुधवार को उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी प्रतिक्रिया कैसी होगी.

    तो क्या बच जाएगी इरफान सुल्तानी की जान?

    स्काई न्यूज के मुताबिक, 26 वर्षीय ईरानी प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी, जिसके बारे में माना जा रहा था कि उसे जल्द ही फांसी दी जाएगी, को बुधवार को मौत की सजा नहीं दी गई. रिश्तेदार ने कहा कि सुल्तानी अभी भी खतरे में है और उसे किसी भी समय फांसी दी जा सकती है.

    सुल्तानी को पिछले गुरुवार को कराज में विरोध प्रदर्शनों के चरम पर गिरफ्तार किया गया था, अधिकारियों द्वारा राष्ट्रव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट लागू करने से कुछ ही समय पहले. इससे पहले, मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने चेतावनी दी थी कि सुल्तानी को हेसर जेल में रखा गया है और कहा था कि कुछ ही घंटों में उसको फांसी दी जा सकती है.

    ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने बुधवार को कहा कि सरकार को त्वरित सुनवाई और फांसी के जरिए हिरासत में लिए गए 18,000 से अधिक लोगों को जल्द से जल्द सजा देनी होगी. उन्होंने कहा, ‘अगर हमें कोई काम करना है, तो हमें उसे अभी करना चाहिए. अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो हमें उसे जल्दी करना होगा. अगर इसमें दो महीने या तीन महीने की देरी होती है, तो इसका उतना असर नहीं होता. अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो हमें उसे तेजी से करना होगा.’

    अमेरिकी मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के मुताबिक, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 2,586 लोग मारे गए हैं. इतना बड़ा डेथ टोल दशकों में ईरान में हुए किसी भी अन्य विरोध प्रदर्शन या अशांति से कहीं ज्यादा है. ये देश की 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाती है.

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