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    माघ मेले में आकर्षण का केंद्र बना इस बाबा का कैंप, आने वाले भक्तों का नाम हो जाता है ‘फटीचर बाबा’

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    माघ मेले में आकर्षण का केंद्र बना इस बाबा का कैंप, आने वाले भक्तों का नाम हो जाता है ‘फटीचर बाबा’


     माघ मेला में संगम तट पर साधु-संतों का हर रूप-रंग भक्ति की छटा बिखेरती है. इन्हीं रंगों में तरह-तरह के बाबा भी नजर आते हैं. जिनमें कोई आश्चर्यचकित करने वाले, तो कोई रुद्राक्षों से सजे होते हैं. इस बार सेक्टर-6 के अंतिम छोर पर एक ऐसा कैंप लगा है, जिसका बैनर पढ़कर हर राहगीर मुस्कुरा उठता है और आगे बढ़ जाता है. बैनर पर लिखा है “फटीचर बाबा का रामराम”. यह नाम इतना सच्चा और सरल है कि श्रद्धा जगाता है. साथ ही चेहरे पर हंसी भी ला देता है.

    खाते हैं सिर्फ मोटी रोटी-दाल और मिर्ची

    “फटीचर बाबा का रामराम” नाम और सादगी की अनोखी मिसाल वाला ये कैंप राम नाम पर पूरी तरह समर्पित है. फिलहाल यहां सिर्फ तीन फटीचर बाबा राम रहते हैं, जो जमीन पर साधारण ढंग से बैठे मिलते हैं मानो मेले में घूमने वाले साधारण श्रद्धालु ही हों. कैंप में प्रवेश करते ही राम-राम की ध्वनि गूंजती है और हर काम से पहले राम नाम का जाप होता है. इस कैंप में रहने वाले बाबा के कपड़ों पर भी राम-राम लिखा हुआ है.

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    इनका भोजन भी बेहद सादा होता है. ये मोटी रोटी, दाल और मिर्ची खाते हैं. वे कहते हैं कि हमारा सब कुछ राम हैं. राम नाम में ही हमारा संसार बसता है. फटीचर बाबा के राम राम कैंप में रहने वाले भिक्षा नहीं मांगते. यहां रहने वाले सभी बाबा दान में मिले धन से कंबल, साड़ियां और चादरें खरीदकर जरूरतमंदों को बांटते हैं. वे स्वयं भोजन बनाकर लोगों को खिलाते भी हैं. कैंप में कोई भेदभाव नहीं होता है. हर आने वाला जमीन पर बैठकर सबके साथ भोजन ग्रहण करता है.

    कैंप में आने वालों का नाम हो जाता है फटीचर बाबा

    सबसे खास बात ये है कि कैंप में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति का नाम “फटीचर बाबा रामराम” हो जाता है. आपको बता दें कि राम नाम के बाद, न ‘जी’ न ‘श्री’ सिर्फ ‘राम’ लगाया जाता है.  14 जनवरी तक यह कैंप तीन फटीचर बाबा राम का आश्रय है, लेकिन मकर संक्रांति पर ये करीब 100 भक्त आ जाएंगे. सभी का बाहरी नाम भले जो हो, कैंप में वे आने के बाद फटीचर बाबा रामराम बनेंगे और सभी मिलकर राम नाम का गुणगान करेंगे. ये सभी चित्रकूट के निवासी हैं.

    नाम सुनकर हर कोई हो रहा आश्चर्यचकित

    दो साल पहले उनके गुरुदेव ब्रह्मदेव ने ही कैंप का नाम “फटीचर बाबा का रामराम” रखा था. उनकी संस्था बहुत पुरानी है. वे बताते हैं कि राम “जब निकले थे, तो न चप्पल थी, न कुछ और सिर्फ फकीरी का जज़्बा था. मेले में ऐसा कैंप सुनकर हर कोई आश्चर्यचकित होता है. जो भी इनसे मिलने जाता है, उनकी सादगी और सत्यनिष्ठा की तारीफ करता हुआ लौटता है. यहां जाति, धर्म या पद का कोई भेद नहीं है, सब राम के नाम में डूबे हैं. यह कैंप न सिर्फ भक्ति का प्रतीक है, बल्कि सच्ची फकीरी का जीवंत उदाहरण भी है.

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