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    तेहरान में आंदोलन तेज… शाह के बेटे की ईरानियों से नई अपील, कहा- अब शहरों पर कब्जा करो

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    तेहरान में आंदोलन तेज… शाह के बेटे की ईरानियों से नई अपील, कहा- अब शहरों पर कब्जा करो


    ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जारी सरकार विरोधी आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है. देशभर में प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी हैं और सख्त सुरक्षा कार्रवाई और लगभग पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद आंदोलन का दायरा लगातार फैल रहा है. इस बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को नए स्तर पर ले जाने की अपील की है.

    रेजा पहलवी ने शनिवार को एक बयान में कहा कि अब लक्ष्य सिर्फ सड़कों पर उतरना नहीं, बल्कि शहरों के प्रमुख केंद्रों पर कब्जा कर उन्हें अपने नियंत्रण में रखना होना चाहिए. उन्होंने देशभर में संगठित नागरिक प्रतिरोध तेज करने की बात कही ताकि मौजूदा सत्ता पर निर्णायक दबाव बनाया जा सके.

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    पूर्व शाह के बेटे रेजा पहलवी ने खासतौर पर अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारियों और श्रमिकों से देशव्यापी हड़ताल शुरू करने का आह्वान किया. उन्होंने परिवहन, तेल, गैस और ऊर्जा सेक्टर के कर्मचारियों को आंदोलन की रीढ़ बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में काम ठप होने से शासन पर सीधा असर पड़ेगा.

    ईरान में 217 लोगों की मौत का दावा

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आ रही हैं. 10 जनवरी तक तेहरान के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 लोगों की मौत दर्ज की गई है. वहीं राष्ट्रीय स्तर पर अन्य रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या कम से कम 65 बताई जा रही है, जिनमें 50 प्रदर्शनकारी और 15 सुरक्षाकर्मी या सरकारी से जुड़े लोग शामिल हैं. इनके अलावा देशभर में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई हैं. अब तक 180 शहरों में 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है.

    प्रमुख आवाज के रूप में उभर रहे पहलवी

    विदेश में रह रहे ईरानियों के बीच रेजा पहलवी एक प्रमुख विपक्षी आवाज के तौर पर उभरे हैं. ईरान में विपक्ष लंबे समय से बिखरा रहा है, लेकिन हालिया अपीलों को देश के भीतर बदलाव की मांग कर रहे कई प्रदर्शनकारियों का समर्थन मिलता दिख रहा है. कार्यकर्ताओं के मुताबिक, प्रदर्शन अब तक 26 प्रांतों के कम से कम 222 स्थानों तक फैल चुके हैं.

    ईरान के प्रदर्शनकारी क्या नारे लगा रहे हैं?

    कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘जाविद शाह’ जैसे नारे लगाए हैं, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के राजशाही दौर की ओर संकेत करते हैं. मशहद शहर में एक सार्वजनिक स्थान से ईरानी झंडा हटाए जाने की घटना भी सामने आई है.

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    आंदोलन को दबाने कोशिश में खामेनेई शासन

    सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए हैं और इंटरनेट और फोन सेवाओं पर कड़ी पाबंदियां लगा दी गई हैं. इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं और ‘न गाजा, न लेबनान, ईरान के लिए मेरी जान’ जैसे नारे लगा रहे हैं.

    रेजा पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मांगा है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे हस्तक्षेप की अपील की है. वहीं, सर्वोच्च नेता खामेनेई ने बाहरी दबाव को नाकाम बताते हुए चेतावनी दी है कि इतिहास में घमंडी शासकों का अंजाम हमेशा पतन ही रहा है.

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