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    ‘केरल से खतरनाक पश्चिम बंगाल के हालात…’, बोले नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर सुदीप्तो सेन

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    ‘केरल से खतरनाक पश्चिम बंगाल के हालात…’, बोले नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर सुदीप्तो सेन


    ‘द केरल स्टोरी’ के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन गुजरात के सूरत शहर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे. ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म के विवादों को लेकर सुदीप्तो सेन ने आजतक से खुलकर बातचीत की है. इस बातचीत में उन्होंने केरल और जम्मू कश्मीर के हालात को पश्चिम बंगाल से जोड़ा है. पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम तुष्टिकरण की बात कही और इस बार चुनाव में सरकार के बदलाव होने का दावा किया है.

    आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में सुदीप्तो सेन ने ‘द केरल स्टोरी‘ के बारे में विवादों को लेकर कहा कि बात यह है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पॉलिटिकल एस्पेक्ट था. पॉलिटिकल एस्पेक्ट इसलिए था क्योंकि केरल और बंगाल, ये जो दो राज्य हैं, यहां सरकार में कौन होगा, यह मुस्लिम वोट तय करता है. तो इस तरह की घटनाएं, जो एक बड़े पॉलिटिकल गेम का हिस्सा हैं, जिसे मैं ‘इस्लामिक टेररिज्म’ कहूंगा. यह बहुत पहले से दुनिया भर में एक्टिव था.

    डायरेक्टर ने आगे कहा, ‘आपने बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री ‘ISIS विडोज’ के बारे में सुना होगा. वहां बहुत पहले ही उजागर हो चुका है कि ISIS का एक खतरनाक प्लान था. दुनिया भर से लड़कियों को ले जाना और सीरिया, लेबनान में आतंकियों की सर्विस के लिए इस्तेमाल करना. हजारों की तादाद में लड़कियां गईं. मुझे लगता था कि भारत से यह बातें सामने क्यों नहीं आईं? जब मैंने 2012 से केरल जाना शुरू किया और इसके बारे में जानकारी लेनी शुरू की, तो पता चला कि केरल इसका एक हब है. उत्तर केरल का जो हिस्सा है, वो एक ऐसे ‘ज्वालामुखी’ पर बैठा हुआ है, जिसका नजारा कभी-कभी देखने को मिलता है, लेकिन आमतौर पर इसे कालीन के नीचे दबा दिया जाता है.’

    सेंसर बोर्ड को दिए सबूत
    ‘2011 में केरल विधानसभा में एक प्रश्न उठा था, तब कांग्रेस की सरकार थी और ओमान चांडी मुख्यमंत्री थे. उन्होंने एक आंकड़े के जवाब में बताया था कि औसतन केरल में हर महीने 1700 से 2200 लड़कियों का धर्मांतरण हो रहा है. उन्होंने यह नहीं बताया कि वो किस तरह का धर्मांतरण है. मेरी रिसर्च के अनुसार इसे ‘मैनीपुलेटिव कन्वर्जन’ चालाकी से किया गया धर्मांतरण कहा जाता है. जहां लड़कियों का ब्रेनवॉश किया जाता है. मैंने अपनी फिल्म में यही दिखाया है. उनके आंकड़ों के हिसाब से अगर हर महीने इतने धर्मांतरण हो रहे थे, तो मैंने कैलकुलेशन करके उस संख्या को 32,000 बताया था. हालांकि, स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है. शायद 50,000 या लाख भी.’

    सुदीप्तो सेन ने आगे कहा, ‘मेरी फिल्म उन लड़कियों की एक गवाही है. फिल्म के अंत में मैंने उन लड़कियों की असल कहानी दिखाई है. एक लड़की जो अभी अफगानिस्तान की जेल में है, उसकी मां से बात हुई; एक लड़की जिसने सुसाइड कर लिया था, उसके माता-पिता कैमरे के सामने आए; और जिस लड़की के साथ गैंगरेप हुआ, उसने भी बात की. जब मैंने फिल्म सेंसर बोर्ड को दी, तो उन्होंने दो महीने तक मुझसे एक-एक वाक्य का सबूत मांगा. मैंने 200 पन्नों के दस्तावेज और तीन घंटे से ज्यादा की वीडियो गवाही दी, जिसके बाद सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के फिल्म पास की. सच को नजरअंदाज करना अपनी जिम्मेदारी से भागना है. अगर कोई मुझे गलत साबित कर दे, तो मुझे खुशी होगी. अगर देश में इस्लामिक आतंकवाद जैसी कोई चीज नहीं है, तो मैं पेड़ के नीचे नाचने-गाने वाली अच्छी फिल्में बनाऊंगा. लेकिन मेरी फिल्म को ‘प्रोपेगेंडा’ कहकर खारिज करना गलत राजनीति है.’

    बंगाल के हालात केरल से ज्यादा खतरनाक- सुदीप्तो सेन
    आजतक से बातचीत में सुदीप्तो सेन ने कहा, ‘कुछ मामलों में मुझे बंगाल के हालात केरल से भी ज्यादा खतरनाक लगते हैं. केरल में यह सब चोरी-छिपे या परोक्ष रूप से हो रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह सब सीधे तौर पर हो रहा है. वहां का राजनीतिक वर्ग सीधे तौर पर इसमें शामिल है. बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनने जैसी खबरें आ रही हैं. यह देश की सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं है. मुख्यमंत्री क्या करेंगी? अगर उन्हें अपनी सरकार बचानी है, तो उन्हें मुस्लिम वोट चाहिए. मुस्लिम वोट के बिना वो सत्ता में नहीं रह सकतीं. यह 1947 से चल रहा है—’मुस्लिम तुष्टीकरण’ एक राजनीतिक रणनीति बन गई है. मुसलमानों को कभी इस देश का नागरिक समझा ही नहीं गया, सिर्फ वोट बैंक समझा गया. एक लोकतांत्रिक देश में ‘शरिया कानून’ जैसा समानांतर कानून कैसे हो सकता है? किसी इलाके का नाम ‘मुस्लिम इलाका’ कैसे हो सकता है? उन इलाकों में अक्सर गंदगी और शिक्षा की कमी होती है क्योंकि किसी राजनीतिक दल ने उनके विकास के बारे में सोचा ही नहीं, बस उन्हें इस्तेमाल किया. यह बंद होना चाहिए.’

    सुदीप्तो सेन ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो मैं जरूर पश्चिम बंगाल के हालात पर भी फिल्म बनाना चाहूंगा. मेरी भाषा सिनेमा है और मैं सिनेमा के जरिए ही अपनी बात रखूंगा. असर तो दिखेगा, धर्म के आधार पर राजनीति होगी. बंगाल में विकास तो दिखता नहीं, बस लोगों को पैसे या सामान (साइकिल, कंप्यूटर) देकर तुष्टीकरण किया जाता है. रिश्वत देकर देश आगे नहीं बढ़ सकता.

    बता दें कि सुदीप्तो सेन को उनकी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के लिए 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (71st National Film Awards) में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. 

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