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    Sakat Chauth Katha 2026: ‘जब गणेश जी पर आया था बड़ा संकट…’ इस कथा के बिना अधूरा है सकट चौथ का विशेष व्रत, जरूर पढ़ें

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    Sakat Chauth Katha 2026: ‘जब गणेश जी पर आया था बड़ा संकट…’ इस कथा के बिना अधूरा है सकट चौथ का विशेष व्रत, जरूर पढ़ें


    Sakat Chauth Katha 2026: सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी 2026 यानी आज रखा जा रहा है. माघ मास की चतुर्थी तिथि को संकष्ठी चतुर्थी कहा जाता है. इस तिथि को तिल चतुर्थी या माघी चतुर्थी भी कहा जाता है. इस दिन भगवान गणेश, सकट माता और चंद्रदेव की उपासना का विधान बताया गया है. कहते हैं कि जो भी इस दिन गणेश जी की पूजा-उपासना करता है, उसके जीवन के सभी संकट टल जाते हैं. मान्यतानुसार, सकट चौथ के दिन माताओं को भगवान गणेश की पूजा के बाद सकट चौथ की कथा जरूर सुननी चाहिए. तो आइए पढ़ते हैं सकट चौथ की कथा. 

    सकट चौथ की व्रत कथा

    सकट चौथ की पहली कथा विघ्नहर्ता भगवान गणेश से संबंधित है. कहते हैं कि इस दिन भगवान गणेश पर एक बड़ा संकट आया था, लेकिन वह टल गया था, इसी कारण इस व्रत को सकट चौथ कहा जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक दिन माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं. उन्होंने अपने पुत्र बाल गणेश को द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया और कहा कि उनके लौटने तक किसी को भी भीतर प्रवेश न करने दें. मां की आज्ञा का पालन करते हुए गणेश जी द्वार पर खड़े हो गए.

    उसी समय भगवान शिव माता पार्वती से मिलने पहुंचे. बाल गणेश ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया. यह देखकर शिव जी क्रोधित हो गए और क्रोध में आकर उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया. अंदर से शोर सुनकर माता पार्वती बाहर आईं. अपने पुत्र को इस अवस्था में देखकर वे अत्यंत व्याकुल हो उठीं और शिव जी से गणेश के प्राण वापस लाने की विनती करने लगीं. माता पार्वती के दुःख से द्रवित होकर भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवन देने का वचन दिया. उन्होंने एक हाथी के बच्चे का सिर लगाकर गणेश जी को फिर से जीवित किया. तभी से भगवान गणेश हाथी मुख वाले पूज्य देव के रूप में विख्यात हुए. मान्यता है कि इसी घटना की स्मृति में महिलाएं अपने पुत्रों की रक्षा और लंबी उम्र की कामना से सकट चौथ का व्रत रखती हैं.

    सकट चौथ पर चंद्रोदय का समय (Sakat Chauth 2026 Moon Rising Timing)

    सकट चौथ पर आज चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 54 मिनट रहेगा. इसी दौरान चंद्रदेवता तो अर्घ्य देकर व्रत का पारण करना है.

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