More
    Home Home यूनिवर्सिटी से बाहर किए जाएंगे आरोपी छात्र? भड़काऊ नारेबाजी मामले में JNU...

    यूनिवर्सिटी से बाहर किए जाएंगे आरोपी छात्र? भड़काऊ नारेबाजी मामले में JNU प्रशासन सख्त

    0
    18
    यूनिवर्सिटी से बाहर किए जाएंगे आरोपी छात्र? भड़काऊ नारेबाजी मामले में JNU प्रशासन सख्त


    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक नारे लगाने से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. 

    JNU प्रशासन ने साफ कहा है कि परिसर को “नफरत की प्रयोगशाला” बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती और दोषी पाए जाने वाले छात्रों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

    JNU ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर बयान जारी करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय विचारों और नवाचार के केंद्र होते हैं, न कि नफरत फैलाने के मंच. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की आजादी एक मौलिक अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर हिंसा, गैरकानूनी गतिविधि या राष्ट्र-विरोधी आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

    विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, घटना में शामिल छात्रों के खिलाफ अपराध की गंभीरता के आधार पर निलंबन, निष्कासन या विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से निष्कासित करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है.

    जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष का बयान

    इस मामले में JNU प्रशासन ने पुलिस को शिकायत भी दी है. शिकायत के मुताबिक, 30 से 35 छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद कथित तौर पर उकसाने वाले नारे लगाए, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दायरे में माना जा रहा है. फिलहाल इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.

    यह भी पढ़ें: ‘RSS और BJP ने करवाया है…’, जेएनयू में हुए बवाल पर कांग्रेस नेता का दावा

    वहीं, इन आरोपों को खारिज करते हुए जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया. हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए नारे आपत्तिजनक लगे, तो मिश्रा ने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री 2002 में हुई इतनी सारी हत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं. उन्हें कौन छू सकता है? लेकिन हमें यह दृढ़ विश्वास है कि जिस फासीवादी विचारधारा का वे प्रतिनिधित्व करते हैं, उसका इस देश में अंत होना होगा.”

    JNU में यह पहला मौका नहीं है जब नारेबाज़ी को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो. इससे पहले भी अफजल गुरु की फांसी के बाद कथित राष्ट्र-विरोधी नारों को लेकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद सामने आ चुका है. उस समय जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उमर खालिद भी मौजूद थे जिन्हें बाद में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

    —- समाप्त —-



    Source link

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here