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    Ebo Noah prophet: इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्मों की ये मान्यताएं… इबो नोआ ने कैसे किया जल-प्रलय और नाव बनाने का दावा?

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    Ebo Noah prophet: इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्मों की ये मान्यताएं… इबो नोआ ने कैसे किया जल-प्रलय और नाव बनाने का दावा?


    Ebo Noah prophet: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें घाना के एक युवक ईबो नोआ ने दुनिया में आने वाली एक भयानक बाढ़ की चेतावनी दी. उसने खुद को ईश्वर का मैसेंजर बताते हुए कहा कि लगातार और भारी बारिश के कारण पूरी पृथ्वी पानी में डूब सकती है. उसका दावा था कि यह स्थिति कई वर्षों तक बनी रहेगी और मानव जीवन को गंभीर खतरे में डाल देगी. उसने बताया कि उसी तबाही से बचने के लिए उसने नावें तैयार की हैं, ताकि वह अपने फॉलोअर्स को सुरक्षित कर सके. बाद में वह अपने दावे से पलट गया, लेकिन ठीक इसी तरह का वाक्या अब्राहमिक धर्मों में देखा भी गया है.

    ईबो नोआ घाना का रहने वाला है और सोशल मीडिया पर उसे ‘ईबो जीसस’ कहा जा रहा है. उसके करीब 40 हजार फॉलोअर्स बताए जाते हैं. उसने दावा किया था कि 25 दिसंबर 2025 से दुनिया में तबाही शुरू होगी. ईबो नोआ का कहना है कि ईश्वर ने उसे आठ बड़ी नावें बनाने का आदेश दिया है, ताकि आने वाली कथित बाढ़ से वह अपने लोगों यानी अपने फॉलोअर्स को बचा सके. उसकी पूरी कहानी आप यहां पढ़ सकते हैं.

    हालांकि, इस चर्चा के बीच इस्लाम धर्म में नबी कहे जाने वाले नूह अलैहिस्सलाम का जिक्र करना भी जरूरी हो जाता है, जिन्होंने धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपने फॉलोअर्स को बाढ़ से बचाने के लिए नाव बनाई थी. इसी तरह की मान्यताएं अलग-अलग रूप में यहूदी और ईसाई धर्मों में भी हैं. इब्राहिम से जुड़े ये तीनों धर्म मानते हैं कि ईश्वर ने नूंह अलैहिस्सलाम या कहें नोआ को एक बड़ी नाव बनाने का हुक्म दिया, ताकि वे लोग जो ईश्वर में विश्वास करते हैं और उनके द्वारा भेजे गए मैसेंजर की बातों में विश्वास करते हैं उन्हें सुरक्षित किया जा सके. 

    इस्लाम धर्म की किताब कुर’आन में कहा जाता है कि नूंह के बेटे ने भी उनकी बात मानने और ईश्वर को मानने से इनकार कर दिया था और इसलिए वह भी उस बाढ़ में डूब कर मर गया. वहीं ईसाई धर्म की किताब बाइबिल में कहा गया है कि नूंह या नोआ के तीन बेटे थे और तीनों को बचा लिया गया था.

    नूंह अलैहिस्सलाम कौन थे?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नूंह अलैहिस्सलाम अल्लाह (ईश्वर) के भेजे मैसेंजर्स में से एक थे. उन्हें एक ऐसी कौम की ओर भेजा गया था जो गलत रास्ते पर चल रही थी और ईश्वर की बातों को मानने से इनकार कर रही थी. कुरान के मुताबिक, नूंह अलैहिस्सलाम ने वर्षों तक अपनी कौम को सही रास्ते पर लाने की कोशिश की, लेकिन बहुत कम लोगों ने उनकी बातों पर विश्वास किया. कुरान में नूंह अलैहिस्सलाम का जिक्र 43 बार आता है. नूंह या नोआ ने अपनी कौम को आने वाली विनाशकारी बाढ़ के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था और कहा जाता है कि उनकी बात मानने वाले लोग बच गए थे.

    नूंह की नाव मिलने का दावा

    बता दें कि नूंह की नाव को लेकर समय-समय पर कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं. साल 1959 में तुर्की के एक सैन्य पायलट ने माउंट अरारात के पास नाव जैसी दिखने वाली एक संरचना की तस्वीरें ली थीं. इसके बाद यह जगह चर्चा में आ गई.  फिर 1980 और 1990 के दशक में कई शोधकर्ताओं ने इस इलाके की जांच की और इसे नूंह की नाव से जोड़कर देखा. साल 2010 में एक चीनी और तुर्की की टीम ने यहां लकड़ी जैसी कुछ चीजें मिलने का दावा भी किया था. 

    हालांकि, अब तक किए गए सभी पुरातात्विक सर्वे और वैज्ञानिक जांच में नूह की नाव के होने का कोई पक्का सबूत नहीं मिला है. विशेषज्ञों का मानना है कि वहां दिखने वाली ये संरचनाएं प्राकृतिक कारणों से बनी हो सकती हैं.

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