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    यूनुस सरकार का नया पैंतरा, अब शेख मुजीबुर की जगह उस्मान हादी के नाम पर ढाका यूनिवर्सिटी का हॉल

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    यूनुस सरकार का नया पैंतरा, अब शेख मुजीबुर की जगह उस्मान हादी के नाम पर ढाका यूनिवर्सिटी का हॉल


    बांग्लादेश की राजधानी ढाका में मौजूदा स्थिति के बीच मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने नया पैंतरा चल दिया है. ढाका यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है. विश्वविद्यालय के बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान हॉल का नाम बदलकर अब ‘शहीद शरीफ उस्मान हादी हॉल’ कर दिया गया है. यह बदलाव शरीफ उस्मान हादी की याद में किया गया है, जिनकी हाल ही में गोली लगने से मौत हो गई थी और उनके जनाजे में हजारों लोग शामिल हुए थे.

    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी जुलाई आंदोलन का अहम चेहरा थे, जिसने पिछले साल बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हादी को 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में एक चुनावी अभियान के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी. 

    हादी की मौत के बाद बड़ा फैसला

    गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां छह दिन बाद गुरुवार को उनकी मौत हो गई. हादी की मौत के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया और कई इलाकों में तोड़फोड़ और हमलों की घटनाएं सामने आईं हैं. 

    इसी बीच ढाका यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन, हॉल यूनियन ने शनिवार को हॉल के मुख्य गेट पर लगे पुराने नेमप्लेट को हटाकर नया बोर्ड लगाया, जिस पर ‘शहीद शरीफ उस्मान हादी हॉल’ लिखा गया है. यह कार्रवाई शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे क्रेन की मदद से शुरू की गई.

    इतना ही नहीं, हॉल की मुख्य इमारत पर बनी शेख मुजीबुर रहमान की ग्रैफिटी म्यूरल को भी पेंट कर ढकने का काम किया गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात 11:15 बजे के बाद म्यूरल को मिटाने की प्रक्रिया शुरू हुई.

    शेख मुजीबुर रहमान की ग्रैफिटी हटाई गई

    ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) के सांस्कृतिक मामलों के सचिव मुसद्दिक इब्न अली मोहम्मद ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि छात्रों की मांग के अनुरूप यह कदम उठाया जाएगा. हॉल काउंसिल के वीपी मुस्लिमुर रहमान ने मीडिया से कहा, ‘छात्रों का स्पष्ट फैसला था कि नाम और ग्रैफिटी हटाई जाए, इसलिए हमने उसी के आधार पर यह कार्रवाई की है.’

    यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति और छात्र आंदोलन में एक नए दौर का संकेत माना जा रहा है, जहां ऐतिहासिक प्रतीकों और वर्तमान राजनीतिक ताकतों के बीच टकराव साफ नजर आ रहा है.

     

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