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    अमेरिका के साथ ‘फर्स्ट फ्रेमवर्क डील’ लगभग पक्की, अधिकारी बोले- अबतक All is Well

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    अमेरिका के साथ ‘फर्स्ट फ्रेमवर्क डील’ लगभग पक्की, अधिकारी बोले- अबतक All is Well


    साल 2025 बीतने वाला है, इस बीच भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 15 दिसंबर 2025 को बताया कि दोनों देशों के बीच फर्स्ट फ्रेमवर्क ट्रेड डील लगभग तैयार है, हालांकि इसकी तारीख अभी तक तय नहीं हुई है. 

    राजेश अग्रवाल ने बताया कि दोनों देशों के बीच 6 दौर की बातचीत के बाद पहला समझौता लगभग अंतिम चरण में है, लेकिन बातचीत जारी रहेगी और कोई समयसीमा नहीं दी जा सकती.  

    दरअसल, यह समझौता व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है, खासकर पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariffs) के मुद्दे को लेकर बात आगे बढ़ रही है, इससे अब दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे उच्च शुल्कों को कम करने और निर्यात-आयात बाधाओं को सुलझाने में मदद मिलेगी.

    टैरिफ के साथ अमेरिका के साथ व्यापार जारी  

    राजेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि भारत के बासमती चावल को लेकर भी चर्चा चल रही है. क्योंकि तमाम प्रोडक्ट्स पर 50% टैरिफ के बावजूद भारत से अमेरिका को बासमती की आपूर्ति जारी है.

    इस डेवलपमेंट से पहले, अमेरिकी डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों देशों के बीच व्यापार माहौल को लेकर बातचीत हुई. दोनों पक्षों ने बताया कि बातचीत अब सिर्फ औपचारिक दौरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भौतिक और वर्चुअल ढंग से विविध मुद्दों पर आगे बढ़ेगी.

    टैरिफ के बावजूद में व्यापार में इजाफा 

    इस बीच भारत की ओर से निर्यात संकेत भी सकारात्मक बने हुए हैं. अक्टूबर के मुकाबले नवंबर 2025 में अमेरिका के लिए भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो लगभग 10.61% की बढ़ोतरी के साथ 6.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, अक्टूबर में $6.31 बिलियर का एक्सपोर्ट रहा था. यह इसके विपरीत है कि अमेरिका पर भारतीय निर्यात कई उच्च टैरिफ संरचनाओं के बावजूद मजबूत रूप से कायम है. 

    बता दें,भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही है, मार्च 2025 में दो देशों ने एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर वार्ता शुरू की, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को लगभग $500 बिलियन तक बढ़ाना है. इसके तहत मुख्य मुद्दों में भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ, बाजार पहुंच, निवेश नियम, और सेवा निर्यात जैसे मुद्दे शामिल हैं. 

    हालांकि अमेरिका ने कुछ भारतीय वस्तुओं पर उच्च टैरिफ लगाया है, और कुछ मामलों में अतिरिक्त शुल्कों को लागू किया है, दोनों देशों ने यह साफ कर दिया है कि वे ऐसे समाधान खोजने की दिशा में गंभीर हैं, जो दोनो पक्षों के हितों का संतुलन बनाए रखें. फिलहाल अमेरिका ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ थोपा है.

    भारत की रणनीति और संतुलन
    भारत ने वार्ता में अपने कृषि और छोटे उद्योगों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा पर जोर दिया है. भारत की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि कोई भी समझौता निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित हो, जिससे घरेलू हितों को नुकसान न पहुंचे. खासकर किसानों और डेयरी उद्योग पर कोई असर न पड़ेय.

    वहीं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिए हैं कि भारत अपनी शर्तों को खुलकर अमेरिका के सामने रख रहा है और समझौता तभी होगा जब वह अपने हितों की रक्षा करता हुआ हो.  

    अब जब दोनों देशों के बीच पहला फ्रेमवर्क डील लगभग तैयार है, दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है. ऐसे में अगर यह फ्रेमवर्क समझौता सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो यह द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यावसायिक सहयोग को मजबूत करने का पहला बड़ा कदम होगा. 

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