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    दो जिंदगी, दो चेहरे और 1500 करोड़ का खेल! कानपुर वाले सोनी की चौंकाने वाली कहानी

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    दो जिंदगी, दो चेहरे और 1500 करोड़ का खेल! कानपुर वाले सोनी की चौंकाने वाली कहानी


    1500 करोड़ रुपये की ठगी का आरोपी रवींद्रनाथ सोनी जितना चमकदार दिखना चाहता था, असल जिंदगी में उतना ही उलझा और चालाक व्यक्ति निकला. एक ओर वह ब्लू चिप इन्वेस्टमेंट कंपनी चलाकर हजारों लोगों से करोड़ों ऐंठ रहा था, वहीं दूसरी ओर वह खुद को एक छोटे व्यापारी के रूप में पेश करने की कहानी रच चुका था. पुलिस की रिमांड पर लिए जाने के बाद उसके छल, उसकी जिंदगी और उसके नेटवर्क की कई परतें अब खुलनी शुरू हो चुकी हैं.

    दरअसल, सोनी की जिंदगी दो हिस्सों में बंटी हुई थी. जहां एक ओर उसका परिवार पिता, डॉक्टर भाई, पत्नी और बेटी एक सामान्य मध्यवर्गीय माहौल में रहते थे, वहीं दूसरी ओर सोनी खुद एक दूसरी महिला के साथ अलग जिंदगी बिता रहा था. जांच एजेंसियां मान रही हैं कि यह सब उसकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था, ताकि किसी भी संभावित गिरफ्तारी या छापे के वक्त उसका असल परिवार जांच के घेरे से दूर रहे.

    हर सवाल पर मुकरने की कोशिश

    सोनी को 1 दिसंबर को कानपुर पुलिस ने पहले से दर्ज 42 लाख की ठगी के केस में गिरफ्तार किया था. जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ी, उसके खिलाफ सिर्फ यूपी नहीं, बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली और दुबई तक से लोग शिकायत दर्ज कराने पहुंचे. शिकायतों की संख्या 700 से पार कर चुकी है और पुलिस का अनुमान है कि यह आंकड़ा हजार को भी पार कर सकता है. सोनी को मंगलवार को छह दिन की रिमांड पर लिया गया. एडीसीपी, एसीपी, एसआईटी की टीम और साइबर एक्सपर्ट्स की पूछताछ के दौरान पुलिस ने जब उससे सीधे सवाल पूछे कि करोड़ों रुपये आखिर गए कहां, तो उसने बेहद मासूमियत दिखाते हुए कहा कि मुझे क्या पता? मैं तो कचौड़ी का आउटलेट लगाकर अपनी फैमिली का गुजारा कर रहा था. उसकी इस बात ने जांच टीम को साफ संकेत दे दिया कि सामने बैठा व्यक्ति कोई साधारण ठग नहीं, बल्कि ऐसा अपराधी है जो योजना बनाकर अपराध करता है और उसी तरह योजना बनाकर उससे बचने की कोशिश भी करता है. एसीपी आशुतोष सिंह कहते हैं कि यह व्यक्ति बेहद चालाक है. पूछताछ में अधिकतर समय चुप रहता है. पूछने पर विषय बदल देता है. पैसे के मूवमेंट पर सवाल किए जाएं तो कचौड़ी की दुकान का बहाना लेकर निकलने की कोशिश करता है.

    20 कंपनियां, 22 खाते और एक हाई-प्रोफाइल प्रमोशन प्लान

    जांच में सामने आया कि रवींद्रनाथ सोनी ने ब्लू चिप नाम से करीब 20 कंपनियां खड़ी की थीं. नाम अलग-अलग, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स अलग-अलग और बैंक खाते भी 22. मगर ऑपरेट करने वाला वही एक आदमी. इन कंपनियों का इस्तेमाल वह निवेश के नाम पर लोगों से पैसा लेने और फिर उसे एक झटके में गायब कर देने के लिए करता था. इस पूरे फर्जी साम्राज्य का प्रचार करने के लिए उसने बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद के साथ करोड़ों रुपये का प्रमोशनल करार किया था. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि प्रमोशन कराने वाले सभी कलाकारों को पूरा भुगतान किया गया था या नहीं. पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने स्पष्ट किया कि जिन-जिन नामों का इस्तेमाल प्रमोशन में हुआ, उन सभी को नोटिस भेजकर बयान दर्ज किए जाएंगे. यह पता करना आवश्यक है कि भुगतान कैसे और किस रूप में हुआ.

    देशों और राज्यों में फैली नेटवर्किंग : कनाडा तक कनेक्शन

    जब पुलिस ने सोनी के डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले तो उसके पीछे एक पूरा नेटवर्क मिला. सबसे चौंकाने वाली जानकारी उसके एक खास सहयोगी के बारे में आई कनाडा स्थित गुरमीत कौर. अधिकारियों का कहना है कि गुरमीत कौर के जरिए सोनी कई विदेशी ट्रांजेक्शन हैंडल करता था और संभव है कि कुछ रकम विदेश भेजी गई हो. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली में भी उसके संपर्क में रहने वाले लोगों की एक लंबी सूची पुलिस के हाथ लग चुकी है. इन सभी से पूछताछ की तैयारी चल रही है. पुलिस मान रही है कि यह सिर्फ एक गैंग नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ठगी का नेटवर्क है.

    सबूतों की तलाश में कई राज्यों में छापेमारी

    सोनी को रिमांड पर लेने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस टीम उसे लेकर कानपुर से निकल पड़ी. उसके जिन राज्यों में ठिकाने बताए गए हैं, वहां पुलिस ने सबूत तलाशने शुरू कर दिए हैं. कई जगहों पर उन मकानों, दफ्तरों और फ्लैटों को खंगाला जा रहा है जिन्हें सोनी ने कभी किराए पर लिया था या जहां वह अक्सर पहुंचता था. सूत्रों का कहना है कि कुछ ठिकानों से लैपटॉप, हार्डडिस्क, इनवेस्टमेंट लिस्ट और फर्जी कंपनियों के दस्तावेज पहले ही बरामद हो चुके हैं. पुलिस इन्हीं दस्तावेजों को जोड़कर एक बड़ी चार्जशीट तैयार करना चाहती है.

    शिकायतें बढ़ती जा रहीं, रकम का आंकड़ा बड़ा होता जा रहा

    कानपुर पुलिस के पास अभी तक जो शिकायतें पहुंची हैं, उनमें से अधिकतर उन लोगों की हैं जिन्होंने ब्लू चिप कंपनी के जरिए लाखों-करोड़ों रुपये निवेश किए थे. उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि उनका पैसा शेयर मार्केट, बिटकॉइन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगाया जा रहा है. कई पीड़ितों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे रिटर्न देकर भरोसा दिलाया गया, फिर बड़ी रकम जमा कराने के बाद कंपनी का पूरा सिस्टम अचानक बंद कर दिया गया. कोई ऑफिस नहीं, कोई हेल्पलाइन नहीं, कोई कर्मचारी नहीं. सब गायब हैं. महाराष्ट्र और गुजरात से आए निवेशकों के बयान बेहद चौंकाने वाले हैं. कुछ ने बताया कि उन्होंने अपनी जीवन भर की बचत लगा दी, कुछ ने जमीन बेचकर पैसा लगाया था. एक बुजुर्ग निवेशक ने पुलिस को बताया कि हमने सोचा था सुरक्षित जगह है, ऊपर से प्रमोशन में बड़े-बड़े चेहरे थे. अब नहीं जानते जिंदगी कैसे चलेगी.

    पूरे गैंग की पड़ताल

    जांच टीम अब यह जानने में जुटी है कि सोनी अकेला काम कर रहा था या इसके पीछे एक पूरा ऑपरेशन सेल था. जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं. पुलिस की मानें तो आने वाले दिनों में कई बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. सोनी के मोबाइल, लैपटॉप और बैंक रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच भी जारी है. इस बात की भी पूरी संभावना है कि उसके पास कई फर्जी पहचानें, कई सिम कार्ड और कई पासपोर्ट हों—जैसे बड़े आर्थिक अपराधियों के पास अक्सर पाया जाता है. पूछताछ में जिस तरह सोनी बार-बार विषय बदलता है, सीधे सवालों से बचता है, और स्वयं को एक छोटे व्यापारी के रूप में पेश करता है, उसने टीम को यह समझने पर मजबूर किया कि यह अपराधी लंबे समय से योजना बनाकर काम करता रहा है.

    रिमांड के दौरान पुलिस यह जानना चाहती है कि ठगी का असली मास्टरमाइंड कौन है? 1500 करोड़ रुपये कहां भेजे गए? विदेश में किस चैनल से रकम भेजी गई? ब्लू चिप की असली डायरेक्टर लिस्ट कौन-सी है? सोशल मीडिया व प्रमोशन में पैसे का इस्तेमाल कैसे हुआ? कितने राज्यों में उसने जमीन-जायदाद खरीदी? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी.

    देशभर में फैले पीड़ित और बढ़ती जांच का दायरा

    रवींद्रनाथ सोनी की गिरफ्तारी के बाद कहानी यहीं खत्म नहीं होती. हर गुजरते दिन के साथ नए पीड़ित सामने आ रहे हैं, नई कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं और ठगी की रकम का आंकड़ा भी बड़ा होता जा रहा है. कानपुर पुलिस ने साफ किया है कि यह केस राज्य के सबसे बड़े आर्थिक अपराध मामलों में से एक बन सकता है. यदि सभी शिकायतें जोड़ी जाएं, तो रकम 1500 करोड़ से कहीं अधिक भी हो सकती है. अभी पुलिस की टीमें कई राज्यों में दबिश दे रही हैं. कई दस्तावेज बरामद हो चुके हैं.

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