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    न जॉब, न ऑफिस… मस्क का दावा- कुछ सालों बाद इंसानों को काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी

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    न जॉब, न ऑफिस… मस्क का दावा- कुछ सालों बाद इंसानों को काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी


    तकनीक जिस रफ्तार से बढ़ रही है, वह आने वाले भविष्य की एक अलग ही तस्वीर दिखाती है. आज हम नौकरी, दफ्तर और काम को जरूरी मानते हैं, लेकिन आने वाला दौर शायद ऐसा हो जहां इंसान काम इसलिए करे क्योंकि वह करना चाहता है, न कि उसे करना पड़े.यही भविष्य की तस्वीर अब एलॉन मस्क ने दुनिया के सामने रखी है., जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.

    ‘भविष्य में काम करना पूरी तरह वैकल्पिक होगा’

    एलॉन मस्क ने जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामत के पॉडकास्ट People by WTF में कहा कि अगला 10–20 साल मानव इतिहास में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है.मस्क के शब्दों में-मेरी भविष्यवाणी है कि भविष्य में काम करना सिर्फ़ एक विकल्प होगा. अगर चाहो तभी काम करो.मस्क का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स इतनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं कि ज्यादातर काम मशीनें करने लगेंगी, और इंसान चाहे तो सिर्फ अपनी पसंद के काम करेगा.

    मस्क का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में काम के घंटों पर जबरदस्त बहस चल रही है.इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति और L&T के CEO ने युवाओं से 70 से 90 घंटे तक काम करने की अपील की थी.इसके उलट, मस्क का कहना है कि भविष्य में इंसान चाहे तो भीड़ वाले शहरों में रहकर काम करे, चाहे कहीं दूर या फिर चाहे तो काम न ही करे. सब कुछ व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर होगा.

    ‘काम बिल्कुल ही न करना पड़े’

    पॉडकास्ट के दौरान जब निखिल कामत ने दुनिया भर में चल रहे 3-दिन और 4-दिन वाले वर्कवीक ट्रायल का जिक्र किया, तो मस्क ने मजाक में कहा-मेरे लिए तो नहीं!लेकिन इसके बाद उन्होंने एक बड़ा बयान दिया-मुझे लगता है कि भविष्य में लोग आधा हफ्ता नहीं, बल्कि शायद बिल्कुल ही काम न करें. काम एक तरह का शौक बन जाएगा.

    मस्क ने इसे समझाने के लिए एक आसान उदाहरण दिया-जैसे आप चाहें तो घर में सब्जी उगा सकते हैं, लेकिन चाहें तो बाजार से भी खरीद सकते हैं. भविष्य में काम भी ऐसा ही होगा-एक विकल्प.

    AI और रोबोट बदलेँगे दुनिया का ढांचा

    मस्क के मुताबिक हम ‘अनेकता का युग’ की तरफ जा रहे हैं, जहां उत्पादक काम मशीनें करेंगी, खर्च घटेगा और इंसान अपने रुचि के काम पर ध्यान दे सकेगा.हालांकि, विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसा भविष्य तभी संभव है जब टेक्नॉलॉजी से होने वाले फायदों का बराबर बंटवारा हो और आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह बदले. एक ओर उद्योगपति युवाओं को अधिक घंटों तक काम करने की सलाह दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मस्क जैसे टेक लीडर्स कह रहे हैं कि आने वाले समय में ‘लंबे घंटे’ जैसी चीज का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा.
     

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