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    भारत के ऊपर से गुजरा इथियोपिया से आया राख का गुबार, लंबी उड़ान भरते हुए अब चीन तक पहुंचा

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    भारत के ऊपर से गुजरा इथियोपिया से आया राख का गुबार, लंबी उड़ान भरते हुए अब चीन तक पहुंचा


    इथियोपिया के हेली गब्बी ज्वालामुखी से निकली राख का बादल अब भारत के ऊपर से गुजर चुका है. यह ज्वालामुखी करीब 10,000 से 12,000 साल बाद एक्टिव हुआ और 23 नवंबर की सुबह विस्फोट किया था. इस विस्फोट से 45,000 फीट यानी लगभग 14 किलोमीटर ऊंचाई तक राख का बादल फैल गया.

    भारत मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, ऊंची हवा के जरिए यह राख का बादल इथियोपिया से लाल सागर, यमन, ओमान होते हुए अरब सागर के ऊपर से पश्चिमी और फिर उत्तर भारत की तरफ आया.

    यह बादल 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ रहा था और 15,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर था. राख के साथ सल्फर डाइऑक्साइड गैस और कांच व चट्टान के छोटे-छोटे टुकड़े भी इसमें शामिल थे.

    भारत के विभिन्न हिस्सों पर प्रभाव

    राख का यह बादल सोमवार रात को पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर क्षेत्रों से भारत में दाखिल हुआ. इसके बाद यह गुजरात, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से होता हुआ गुजरा. राख के बादल के कारण सोमवार को कई हवाई उड़ानें रद्द कर दी गईं या उन्हें नए रास्ते अपनाने पड़े.

    राख बादल की ताजा स्थिति

    IMD के अनुसार, मंगलवार की रात 10:30 बजे के बाद यह राख का बादल भारत से निकल कर चीन की तरफ बढ़ गया था. सरकारी टीवी समाचार चैनल डीडी न्यूज ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उपग्रह तस्वीरों से साफ दिखा कि राख का बादल अब भारत के ऊपर नहीं है और चीन के ऊपर जाकर पहुंच चुका है. 

    यह भी पढ़ें: लाल सागर से दिल्ली तक… इथियोपिया के ज्वालामुखी की राख की पूरी कहानी

    उड्डयन और मौसम पर असर

    नागरिक उड्डयन विभाग (DGCA) ने हवाई कंपनियों को कहा था कि वे राख के बादल वाले रास्तों से बचें और वैकल्पिक रास्ते लें. हालांकि IMD ने साफ किया कि राख बादल बहुत ऊंची हवा में है, इसलिए इसका मौसम या हवा की गुणवत्ता पर कोई खास असर नहीं पड़ा. यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और ट्वूलूज वोल्केनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर ने इस राख बादल की लगातार निगरानी की.

    विशेषज्ञों का कहना है कि हेली गब्बी ज्वालामुखी का यह विस्फोट अफार रिफ्ट इलाके की जमीन की स्थिरता में दिक्कत को दिखाता है और यह कि कैसे उपग्रह की मदद से ऐसी घटनाओं पर नजर रखी जा सकती है.

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