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    तीन शहरों में 3 स्टूडेंट्स ने की खुदकुशी…कहीं टीचर से परेशान बच्चा कूदा, कहीं दोस्तों की बुलिंग बनी वजह

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    तीन शहरों में 3 स्टूडेंट्स ने की खुदकुशी…कहीं टीचर से परेशान बच्चा कूदा, कहीं दोस्तों की बुलिंग बनी वजह


    देश के तीन अलग-अलग शहरों में हाल के दिनों में स्कूली छात्रों के खुदकुशी के मामले ने सभी को हैरान कर दिया है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में हुई तीन दर्दनाक घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या स्कूल वास्तव में छात्रों के लिए सुरक्षित हैं? क्या बुलिंग, शिक्षक द्वारा उत्पीड़न या संवेदनहीनता इन मौतों की वजह बन रही है? तीनों ही मामलों ने छात्रों की सुरक्षा और मानसिक हालत को लेकर परिजनों को चिंता में डाल दिया है.

    रीवा में टीचर पर टॉर्चर करने का आरोप

    रीवा जिले के सेमरिया स्थित एक स्कूल में कक्षा 11वीं की छात्रा ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस को गुरुवार को उसकी कॉपी में लिखा सुसाइड नोट मिला जिसमें छात्रा ने स्कूल के एक शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए. छात्रा ने लिखा कि शिक्षक मारते समय उसका हाथ पकड़ते थे, मुट्ठी बंद कर चैलेंज देते थे और पनिशमेंट देने के बहाने उसकी उंगलियों के बीच पेन डालकर दबाते थे. घटना के बाद परिजन स्तब्ध हैं और स्कूल पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

    परिजनों का कहना है कि घर में उसे किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं थी और वह परिवार की लाडली थी. उनकी मानें तो उसकी परेशानी स्कूल से जुड़ी हुई थी और कोई उसे अत्यधिक टॉर्चर कर रहा था, जिसके कारण वह मानसिक रूप से टूट गई. एएसपी आरती सिंह ने बताया कि पुलिस ने लेटर को जब्त कर लिया है और सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है. जांच के बाद ही छात्रा की मौत के पीछे की असली वजह सामने आएगी.

    जयपुर में 9 साल की अमायरा की मौत

    वहीं जयपुर में सिर्फ 9 साल की अमायरा की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया. एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली यह बच्ची लंबे समय तक स्कूल में बुलिंग का शिकार हो रही थी. इसके बाद उसने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी. वायरल हुए सीसीटीवी फुटेज ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजनों का आरोप है कि बच्ची और उसके माता-पिता ने बार-बार शिकायत की, लेकिन स्कूल प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.

    आज तक की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि कई स्कूलों में सीबीएसई की सुरक्षा गाइडलाइन का पालन नहीं होता है. रिपोर्ट के अनुसार कई स्कूल भावनात्मक सुरक्षा, बुलिंग नियंत्रण, स्टाफ संवेदनशीलता और सीसीटीवी मॉनिटरिंग जैसे बुनियादी मानकों को भी गंभीरता से नहीं लेते. सीबीएसई के नियम स्पष्ट कहते हैं कि बच्चों की भावनात्मक सुरक्षा, बुलिंग रोकथाम और निगरानी प्रत्येक स्कूल की सर्वोच्च जिम्मेदारी है.

    दिल्ली में स्कूली छात्र ने दी जान, कमेटी गठित

    दिल्ली के एक निजी स्कूल में कक्षा 10वीं के एक छात्र की संदिग्ध मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है. मंगलवार को 10वीं में पढ़ने वाले इस छात्र ने राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन से कूदकर जान दे दी थी. सुबह वह अपने ड्रामा क्लब की एक्टिविटी के लिए घर से निकला था. मृतक छात्र के पास जो सुसाइड नोट मिला था उसमें उसने कई टीचरों पर लंबे वक्त से मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. 

    इस मामले में शिक्षा निदेशालय ने उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित कर दी. समिति को घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर 3 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है, इसका उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही तय करना, कारणों का विश्लेषण करना और सुधारात्मक कदम सुझाना है. परिजनों और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है, और लोग मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए.

    नोट:- (अगर आपके या आपके किसी परिचित के मन में आता है खुदकुशी का ख्याल तो ये बेहद गंभीर मेडिकल एमरजेंसी है. तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. आप टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416  पर भी कॉल कर सकते हैं. यहां आपकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और विशेषज्ञ आपको इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी परामर्श देंगे. याद रखिए जान है तो जहान है.) 

     

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