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    ताइवान विवाद पर जापान के खेमे में अमेरिका, चीन से कहा- दबाव बिल्कुल नहीं चलेगा

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    ताइवान विवाद पर जापान के खेमे में अमेरिका, चीन से कहा- दबाव बिल्कुल नहीं चलेगा


    अमेरिका ने ताइवान विवाद पर बढ़ते तनाव के बीच जापान को खुलकर समर्थन दिया है. यह समर्थन तब आया है जब चीन ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के ताइवान को लेकर दिए गए बयान पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया जताई है. 

    ताकाइची ने 7 नवंबर को संसद में कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो यह जापान के लिए “जीवन-खतरे जैसी स्थिति” बन सकता है और ऐसे में जापान सामूहिक आत्मरक्षा के तहत प्रतिक्रिया दे सकता है. चीन ने इन बातों का कड़ा विरोध किया और जापान पर क्षेत्र को अस्थिर करने का आरोप लगाया.

    इसी बीच, जापान के विदेश मंत्री और अमेरिका के राजदूत जॉर्ज ग्लास की बैठक में US ने साफ कहा कि चीन की प्रतिक्रिया “उकसाने वाली और क्षेत्रीय स्थिरता के खिलाफ” है. ग्लास ने कहा कि यह “चीनी आर्थिक दबाव” का एक और उदाहरण है – खासकर तब, जब चीन ने जापानी समुद्री उत्पादों पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिया और अपने नागरिकों को जापान न जाने की सलाह दी.

    ग्लास ने कहा कि अमेरिका की जापान के साथ सैन्य साझेदारी बिल्कुल “अनशेकएबल” है, और जापान की सुरक्षा – जिसमें सेनकाकू द्वीप भी शामिल हैं. US की प्राथमिकता है. सेनकाकू द्वीप जापान के नियंत्रण में हैं, लेकिन चीन भी उन पर दावा करता है और उन्हें “दियाओयू” कहता है.

    दूसरी ओर, चीन लगातार जापान पर दबाव बढ़ा रहा है. उसने चेतावनी जारी की है कि ताकाइची अपने बयान वापस लें, लेकिन ताकाइची ने साफ कहा कि जापान की स्थिति पहले भी यही थी और आगे भी बदलेगी नहीं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे चीन के साथ बेहतर संबंध चाहती हैं.

    यह भी पढ़ें: चीन के दुश्मन ताइवान को अमेरिका देने जा रहा मिसाइल डिफेंस सिस्टम, क्या और भड़केगी आग?

    चीन ने हाल ही में जापान की अमेरिका को पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर निर्यात करने पर भी नाराज़गी जताई. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान पर लगाए गए प्रतिबंध उसे पूरी तरह हथियारमुक्त रखने के लिए थे, लेकिन जापान लगातार अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ा रहा है. चीन ने आरोप लगाया कि जापान “तेज़ी से पुनः सैन्यीकरण” कर रहा है और यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के खिलाफ है.

    चीन का कहना है कि अगर जापान इस दिशा में आगे बढ़ता रहा, तो यह कदम “असफलता” में ही खत्म होगा. इस बीच ताइवान को लेकर चीन का रुख साफ है – वह उसे अपनी भूमि का हिस्सा मानता है और एकीकरण का दावा करता है.

    एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यह नया तनाव अब अमेरिका, चीन और जापान – तीनों को एक संवेदनशील मोड़ पर ले आया है. 

    तनाव के असर

    चीन ने जापान के खिलाफ कई कदम उठाए हैं – व्यापार पर प्रतिबंध, पर्यटन में कमी, और चेतावनियां. इससे जापान की अर्थव्यवस्था और माहौल पर असर पड़ रहा है. साथ ही, चीन ने जापान के रक्षा नीति में बदलावों को लेकर भी चिंता जताई है, जिसे वह सैन्यवाद की ओर बढ़ने का संकेत मानता है. 

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