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    ‘वो जासूस हो सकते हैं…’, भारतीय मूल की निक्की हेली के बेटे ने कह दी इतनी बड़ी बात

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    ‘वो जासूस हो सकते हैं…’, भारतीय मूल की निक्की हेली के बेटे ने कह दी इतनी बड़ी बात


    भारतीय मूल की अमेरिकी रिपब्लिकन नेता निक्की हेली (Nikki Haley) के बेटे नलिन हेली (Nalin Haley) ने अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी स्टूडेंट्स को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिस पर विवाद हो सकता है.

    24 साल के नलिन हेली ने ट्रंप प्रशासन से विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने की मांग की है. उनका आरोप है कि इन विदेशी छात्रों में से कुछ जासूस हो सकते हैं. इतना ही नहीं नलिन ने इमिग्रेशन पॉलिसी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विदेश में जन्मे नागरिकों को अमेरिका में किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए.

    दक्षिणपंथी कमेंटेटर टकर कार्लसन के पॉडकास्ट में नलिन हेली ने कहा कि हमें अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या को रोकना और सीमित करना होगा. इनमें से कुछ विदेशी सरकारों के लिए जासूस होते हैं. लेकिन बात सिर्फ इतनी है कि हमें अपने बच्चों को सबसे पहले रखना चाहिए.

    नलिन ने कहा कि नेचुरलाइज्ड सिटिजंस को किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए. अमेरिका में बड़ा होना ही इस देश को समझने का सबसे बड़ा हिस्सा है. उन्होंने मांग की कि केवल अमेरिका में जन्मे लोग ही निर्वाचित पदों के लिए पात्र होने चाहिए. नलिन हेली ने यह भी कहा कि दोहरी नागरिकता को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए.

    उन्होंने कहा कि हमें दोहरी नागरिकता की भी इजाजत नहीं देनी चाहिए क्योंकि वो सबसे बेवकूफाना चीज है. या तो आप अमेरिकी हैं या नहीं हैं और सब लोग इसे इतना जटिल बना देते हैं. मुझे पिछली पीढ़ी में यही बात बुरी लगती है कि वो हमेशा नियमों, प्रक्रिया और रेगुलेशन की बात करती है। नहीं, बात वास्तव में बहुत साफ-सुथरी है.

    बता दें कि यह बयान ठीक एक हफ्ते बाद आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे हैं. 

    इससे पहले भी नलिन हेली ने H-1B वीजा पूरी तरह खत्म करने और कानूनी आप्रवासन पर रोक लगाने की वकालत की थी. उनका तर्क था कि खराब हालत वाली अर्थव्यवस्था में अमेरिकी कामगारों की रक्षा के लिए ये कदम जरूरी हैं. नलिन को बड़े पैमाने पर आप्रवासन खत्म करने की मांग करने पर कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है. कई लोग उन्हें यह याद दिला रहे हैं कि उनके दादाजी खुद 1969 में भारत से अमेरिका आए थे.

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