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    अल फलाह यूनिवर्सिटी कैसे बना आतंक का ठिकाना… जांच के लिए कैम्पस पहुंचे DGP, 4 घंटे तक की छानबीन

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    अल फलाह यूनिवर्सिटी कैसे बना आतंक का ठिकाना… जांच के लिए कैम्पस पहुंचे DGP, 4 घंटे तक की छानबीन


    दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट के बाद एनआईए की जांच लगातार जारी है. इसी बीच हरियाणा के DGP ओ पी सिंह मंगलवार को फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी पहुंचे. वहां उन्होंने यूनिवर्सिटी कैम्पस में चार घंटे बिताए. उनके साथ ADIG/CID की टीम थी. उन्होंने अफसरों, एडमिनिस्ट्रेशन, फैकल्टी, छात्रों, आसपास के गांवों के लोगों और यहां तक कि एक मौलवी के परिवार से भी बात की है. 

    यूनिवर्सिटी कैंपस में मौजूद उस हर जगह पर उनकी निगरानी में जांच की गई, जो आतंकियों के लिए ठिकाना, सेफ हाउस और ऑपरेशन पॉइंट था. 10 नवंबर को हुए धमाके में 15 लोगों की मौत के बाद इस यूनिवर्सिटी का नाम पहली बार सामने आया था. धमाका करने वाली हुंडई i20 डॉक्टर उमर नबी चला रहा था, जो इसी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रहा है. उसके साथ कई डॉक्टर साजिश में शामिल थे.

    इनमें डॉ. मुज़म्मिल गनई और डॉ. शाहीन सईद का नाम भी था. उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था. इस यूनिवर्सिटी में जांच के दौरान व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ था. फरीदाबाद के एक किराए के घर से करीब 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी. इसका कनेक्शन कश्मीर, हरियाणा और यूपी में फैले जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गज़वत-उल-हिंद से जुड़ा था. 

    इस नेटवर्क में अहम किरदार एक मौलवी निभा रहा था, जिसकी जड़ें यूनिवर्सिटी और फरीदाबाद की एक मस्जिद तक जुड़ी हुई थीं. यहां पहुंचने के बाद DGP ओ पी सिंह ने एडमिनिस्ट्रेशन को साफ निर्देश दिए कि सिक्योरिटी कमियों की गहराई से जांच की जाए. उन्होंने पूछा कि आखिर यह टेरर मॉड्यूल इतने लंबे समय तक कैसे सक्रिय रहा. इन्हें यूनिवर्सिटी में ठिकाने किसने दिलवाए. 

    उन्होंने ये भी पूछा कि आखिरी हथियारों और बारूद की इतनी बड़ी खेप कहां छिपाई गई थी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घटना के बाद से लापता फैकल्टी मेंबर्स को किसी भी कीमत पर जल्द खोजा जाए. उन्होंने फरीदाबाद के डिप्टी कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर के साथ एक संयुक्त मीटिंग भी की है. इसमें साफ आदेश दिया गया कि सभी धार्मिक संस्थानों की दोबारा जांच की जाए.

    किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के बारे में केंद्रीय एजेंसियों को तुरंत अलर्ट भेजने को कहा गया. इसके अलावा DGP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि छात्रों से बात के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने लिखा, ”मैंने आतंकवादियों के ठिकानों का इंस्पेक्शन किया.”

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