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    मोकामा ही नहीं इन सीटों पर भी रखिए नजर, पहले चरण में बाहुबली और उनके परिवार की आधा दर्जन सीटों पर फाइट

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    मोकामा ही नहीं इन सीटों पर भी रखिए नजर, पहले चरण में बाहुबली और उनके परिवार की आधा दर्जन सीटों पर फाइट


    बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए गुरुवार को मतदान है. इस चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी हुई है. दुलारचंद यादव की हत्या के बाद सभी की निगाहें बाहुबली अनंत सिंह की मोकामा सीट पर लगी हुई हैं, जहां पर पहले ही चरण में वोटिंग है. 

    पहले चरण में मोकामा सीट पर अनंत सिंह के खिलाफ वीणा देवी चुनाव लड़ रही हैं, जो बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी हैं. हालांकि, पहले चरण में सिर्फ मोकामा विधानसभा सीट नहीं है, जहां पर बाहुबली नेता की अग्निपरीक्षा है, बल्कि आधा दर्जन से ज्यादा सीटों पर बाहुबली नेता या फिर उनका परिवार चुनावी मैदान में है.

    बिहार के पहले चरण में आधा दर्जन से ज्यादा बाहुबली नेताओं और उनके परिवार की साख दांव पर लगी है, जिसमें 4 जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं तो तीन आरजेडी के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं.

    मोकामा सीट पर बाहुबली बनाम बाहुबली

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    दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा विधानसभा सीट बिहार की सबसे हॉट सीट बन गई है. दुलारचंद यादव की हत्या का आरोप जेडीयू के बाहुबली उम्मीदवार अनंत सिंह पर लगा है, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. मोकामा सीट पर अनंत सिंह लगातार चार बार से विधायक हैं, लेकिन इस बार उनका मुकाबला बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी से है, जो आरजेडी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। इसके अलावा जन सुराज पार्टी से पीयूष प्रियदर्शी किस्मत आजमा रहे हैं.

    अनंत सिंह के सामने अपनी जीत के सिलसिले को बरकरार रखने की चुनौती है तो वीणा देवी और पीयूष प्रियदर्शी उन्हें मात देने की कवायद में हैं. वीणा देवी के पति सूरजभान सिंह ने 25 साल पहले 2000 में अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह को सियासी शिकस्त दे चुके हैं और अब उनकी पत्नी वीणा देवी जेडीयू के अनंत सिंह के खिलाफ दमखम लगा रही हैं.

    एकमा सीट पर बाहुबली धूमल सिंह

    सारण जिले की एकमा विधानसभा सीट पर भी सभी की निगाहें लगी हुई हैं, जहां से जेडीयू के टिकट पर बाहुबली मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह किस्मत आजमा रहे हैं. धूमल सिंह 2010 और 2015 में इस सीट से जेडीयू के विधायक रह चुके हैं, लेकिन पिछले चुनाव में आरजेडी के श्रीकांत यादव ने मात देकर अपना कब्जा जमाया था. इस बार फिर से धूमल सिंह और श्रीकांत के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है.

    एकमा सीट पर जेडीयू से धूमल सिंह मैदान में हैं तो आरजेडी से श्रीकांत यादव, जन सुराज पार्टी से देव कुमार सिंह और बसपा के लक्ष्मण मांझी मैदान में हैं। यूपी से लगी हुई सीट होने के चलते बसपा भी पूरा दमखम लगा रही है और जन सुराज के टिकट पर राजपूत कैंडिडेट के उतरने से धूमल सिंह की चुनौती बढ़ गई है.

    कुचायकोट पर बाहुबली बनाम उद्योगपति 

    गोपालगंज की कुचायकोट विधानसभा सीट पर जेडीयू के बाहुबली नेता अमरेंद्र पांडे उर्फ पप्पू पांडे चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट से अमरेंद्र जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं, 2010 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं. इस बार उनके सामने महागठबंधन से कांग्रेस ने दुबई के कारोबारी हरिनारायण सिंह कुशवाहा पर दाँव लगाया है। बाहुबली बनाम उद्योगपति का यह मुकाबला कुचायकोट की राजनीति को फिर से चर्चा में ले आया है.

    अमरेंद्र पांडे के साथ विवादों और मुकदमों की लंबी फेहरिस्त भी जुड़ी है-ट्रिपल मर्डर, फायरिंग, रंगदारी और लूट जैसे गंभीर आरोपों में वे 14 मामलों में नामजद हैं, लेकिन किसी मामले में सजा नहीं हुई है. यही नहीं उनके बड़े भाई सतीश पांडेय का नाम भी 90 के दशक के कई संगीन मामलों से जुड़ा रहा है. मंत्री बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड और चाड़ी नरसंहार जैसे मामले में उनका नाम चर्चा में रहा है. ऐसे में देखना होगा कि बाहुबली अमरेंद्र जीतते हैं या फिर साफ-सुथरी छवि के हरिनारायण कुशवाहा.

    दानापुर में रीतलाल यादव का इम्तिहान

    दानापुर विधानसभा सीट पर आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे बाहुबली रीतलाल यादव जेल में बंद हैं. इस बार दानापुर में उनका मुकाबला बीजेपी के रामकृपाल यादव से है, जो कभी लालू यादव के राइट हैंड माने जाते थे और पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से कई बार सांसद रह चुके हैं. इस बार दानापुर की लड़ाई यादव बनाम यादव की बन गई है. यही वजह है कि लालू यादव ने उतरकर बाहुबली रीतलाल यादव को जिताने की अपील की.

    पटना की दानापुर सीट आरजेडी के लिए नाक की लड़ाई बन गई है.यहां से लालू यादव दो बार विधायक रहे हैं. यह सीट पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र के तहत आती है, जहां से लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती लोकसभा सांसद हैं। यही वजह है कि लालू यादव दानापुर सीट पर रीतलाल को जीत का समर्थन जुटाकर रामकृपाल से बदले का हिसाब बराबर कर लेना चाहते हैं.

    शहाबुद्दीन के बेटे बचा पाएंगे विरासत

    सीवान की सियासत लंबे समय तक बाहुबली रहे शहाबुद्दीन के इर्द-गिर्द सिमटी रही है. अब शहाबुद्दीन की सियासी विरासत उनके बेटे ओसामा शहाब संभालने के लिए चुनावी मैदान में उतरे हैं, जिनकी अग्निपरीक्षा पहले ही चरण में होनी है. यही ओसामा की सबसे बड़ी ताकत है, जिसके चलते राष्ट्रीय जनता दल ने उन्हें अपने मौजूदा विधायक का टिकट काटकर रघुनाथपुर से उम्मीदवार बनाया है। यही ताकत उनके लिए सियासी तौर पर कमजोरी भी है, जिसके चलते ही वे विपक्ष के निशाने पर हैं.

    रघुनाथपुर विधानसभा सीट पर दो बार के विधायक हरिशंकर यादव का टिकट काटकर आरजेडी ने ओसामा शहाब को उतारा है. ओसामा के सामने जेडीयू ने विकास कुमार सिंह उर्फ जीशु सिंह को रघुनाथपुर सीट से चुनावी मैदान में उतारा है तो प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज से राहुल कुमार सिंह किस्मत आजमा रहे हैं. शहाबुद्दीन के बाद उनकी पत्नी हिना शहाब चार बार लोकसभा चुनाव लड़ीं, लेकिन जीत नहीं सकीं और अब उनके बेटे उतरे हैं.

    प्रभुनाथ सिंह के बेटे की अग्निपरीक्षा

    सारण की सियासत में एक वक्त था जब बाहुबली प्रभुनाथ सिंह का नाम ही पहचान हुआ करता था. सारण की राजनीति प्रभुनाथ सिंह के करीब सिमटी रही, उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए रणधीर सिंह इस बार सियासी पाला बदलकर उतरे हैं. रणधीर सिंह जेडीयू के टिकट पर मांझी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं. रणधीर सिंह के सामने महागठबंधन से सीपीआई (एम) के सत्येंद्र यादव हैं तो जन सुराज पार्टी से वाईवी गिरी ताल ठोक रही हैं.

    2020 में सत्येंद्र यादव विधायक बने थे और अब दूसरी बार अपनी जीत के लिए मैदान में उतरे हैं, लेकिन बाहुबली प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है. सांसद भी रह चुके प्रभुनाथ सिंह फिलहाल मशरक के तत्कालीन एमएलए अशोक सिंह की हत्याकांड के मामले में जेल में सजा काट रहे हैं. ऐसे में रणधीर सिंह क्या जीत दर्ज कर पाएंगे?
     

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