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    क्‍या खत्‍म होगी Tata Trust के बोडरूम की कलह? आज डायरेक्‍टर्स की बैठक में बड़ा फैसला

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    क्‍या खत्‍म होगी Tata Trust के बोडरूम की कलह? आज डायरेक्‍टर्स की बैठक में बड़ा फैसला


    टाटा ग्रुप में सबकुछ ठीक नहीं है. आपस की लड़ाई सरकार तक पहुंच चुकी है, जिस कारण सबकी नजर टाटा ग्रुप में शुरू हुए कलह पर आकर टिक गई है. इसी समस्‍या की चर्चा टाटा ट्रस्ट्स के न्यासी बोर्ड की आज, 10 अक्टूबर, 2025 को बैठक में हो सकती है. यह बैठक कई दिनों से चल रहे आंतरिक मतभेदों के बाद हो रही है और रतन एन. टाटा की पहली पुण्यतिथि के ठीक एक दिन बाद हो रही है. 

    मंनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक पिछले कुछ हफ्तों की तुलना में ज्‍यादा शांत माहौल में होने की संभावना है, क्‍योंकि ट्रस्टियों के एक गुट, जो कथित तौर पर चेयरमैन नोएल टाटा से असहमत थे, को बोला गया है कि वे ट्रस्‍टों को सही तरीके से चलाने के लिए सहयोग करें. टाटा ट्रस्ट्स की टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस में सामूहिक रूप से 66% हिस्सेदारी है. 

    उम्‍मीद की जा रही है कि टाटा ट्रस्‍ट के बीच विवाद जल्‍द से जल्‍द सुलझ सकता है. वहीं बोर्ड से उम्‍मीद की जाती है कि वह तात्कालिक शासन या बोर्ड प्रतिनिधित्व संबंधी मुद्दों के बजाय स्वास्थ्य सेवा परियोजनाओं के लिए धन आवंटन पर फोकस करेगा. 

    बोर्ड मीटिंग का एजेंडा क्‍या है? 
    रिपोर्ट के अनुसार एजेंडे की खास बात नए स्‍वास्‍थ्‍य सेवा फंडिंग प्रपोजल को मंजूरी देना है. टाटा संस के बोर्ड के स्‍ट्रक्‍चर में बदलाव या नॉमिनेटेड डायरेक्‍टर्स को बदलने का कोई प्रस्‍ताव नहीं है. टाटा ट्रस्ट के समक्ष टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट के नॉमिनेटेड डायरेक्‍टर्स वेणु श्रीनिवासन की बोर्ड स्थिति पर पुनर्विचार या समीक्षा करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. 

    टाटा ट्रस्‍ट के बीच क्‍या है विवाद का केंद्र? 
    टाटा ट्रस्‍ट के विवाद के केंद्र में चेयरमैन नोएल टाटा और ट्रस्‍टी मेहली मिस्‍त्री के साथ-साथ ट्रस्‍टी प्रमित झावेरी, डेरियस खंबाटा और जहांगीर एच सी जहांगीर के बीच मतभेद है. यह विवाद इस बात पर है कि ट्रस्‍टों के डायरेक्‍टर्स अपने मन से फैसला ले रहे हैं और चेयरमैन की बातें इग्‍नोर की ज रही हैं. हालांकि ट्रस्‍टों के अलग-अलग होने से कोई खुला टकराव नहीं है, लेकिन सोर्स के मुताबिक, मतभेद ज्‍यादा बढ़ चुका है. कुछ ट्रस्टी प्रशासन की कड़ी निगरानी की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य का मानना ​​है कि अत्यधिक जांच-पड़ताल से अध्यक्ष का अधिकार कमज़ोर हो सकता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है. 

    सरकार ने भी जताई है चिंता 
    इस मामले में सरकार की भागीदारी ने भी इसके महत्व को उजागर किया है. इस सप्ताह की शुरुआत में, गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा, टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा से मुलाकात की, ताकि समाधान निकाला जा सके और ट्रस्टों में स्थिरता सुनिश्चित की जा सके. माना जा रहा है कि सरकार ने चिंता व्यक्त की है कि लगातार विभाजन टाटा संस के संचालन को प्रभावित कर सकता है, खासकर ऐसे समय में जब होल्डिंग कंपनी पुनर्गठन और संभावित भविष्य की लिस्टिंग पर विचार कर रही है. 

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