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    ‘सोशल मीडिया पर बहुत कुछ कहा गया…’, SIR के आलोचकों को CEC ज्ञानेश कुमार का जवाब

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    ‘सोशल मीडिया पर बहुत कुछ कहा गया…’, SIR के आलोचकों को CEC ज्ञानेश कुमार का जवाब


    चुनाव आयोग ने सोमवार को बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि राज्य में दो चरणों में मतदान होगा, पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को. वहीं नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार ने SIR पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने ही इस प्रक्रिया की मांग की थी, हालांकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहुत कुछ कहा गया.

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में पांच साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहा है और चुनाव आयोग का काम दो हिस्सों में बंटा होता है- पहला, मतदाता सूची तैयार करना और दूसरा, चुनाव प्रक्रिया को अंजाम देना. उन्होंने बताया कि 24 जून 2025 से मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) की प्रक्रिया शुरू हुई थी. इसके बाद 1 अगस्त को ड्राफ्ट सूची जारी की गई और 1 सितंबर तक दावा-आपत्ति का समय दिया गया. अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की गई. अगर अब भी किसी मतदाता को कोई गलती लगती है, तो वह जिलाधिकारी के पास अपील दाखिल कर सकता है.

    ‘राजनीतिक दलों ने ही SIR की मांग की थी’

    ज्ञानेश कुमार ने SIR पर उठे सवालों पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई बातें कही गईं, लेकिन सच्चाई यह है कि राजनीतिक दलों ने ही इसकी मांग की थी. पक्षपात के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और यह संविधान के दायरे में रहकर राष्ट्रीय और राज्य विधानसभा चुनाव कराती है. स्थानीय अधिकारी मतदाता सूची तैयार करते हैं, और ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) अंतिम निर्णय लेते हैं. अगर किसी को कोई आपत्ति है, तो वह जिलाधिकारी और उसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील कर सकता है.’

    पक्षपात के आरोपों का दिया जवाब

    उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया में सक्रिय रहना चाहिए. कहीं भी पक्षपात का मामला नहीं है, क्योंकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई है. बिहार के लोगों ने SIR प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की है. किसी भी मतदाता ने शिकायत नहीं की, और यदि कहीं कोई समस्या आई भी, तो उसे ERO स्तर पर ही सुलझा लिया गया. नामों को मतदाता सूची से हटाने के मुख्य कारण हैं- मृत्यु, नागरिकता साबित न होना, या स्थायी रूप से किसी अन्य राज्य में चले जाना. इस संबंध में सभी आंकड़े राजनीतिक दलों के साथ साझा किए गए हैं.

    बिहार में कुल 7.43 करोड़ वोटर

    चुनाव आयोग के मुताबिक, बिहार में कुल 7.43 करोड़ मतदाता हैं. इनमें करीब 3.92 करोड़ पुरुष, 3.50 करोड़ महिला और 1,725 ट्रांसजेंडर वोटर शामिल हैं. इसके अलावा 7.2 लाख दिव्यांग मतदाता और 4.04 लाख वरिष्ठ नागरिक (85 वर्ष से ऊपर) भी वोट देने के पात्र हैं. राज्य में 14 हजार से अधिक शतायु मतदाता, यानी 100 साल या उससे अधिक उम्र के नागरिक, भी मतदान सूची में दर्ज हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 1.63 लाख सर्विस वोटर्स, 1.63 करोड़ युवा मतदाता (20-29 वर्ष) और 14.01 लाख प्रथम बार वोट देने वाले (18-19 वर्ष) मतदाता शामिल हैं. ये आंकड़े 30 सितंबर 2025 तक के हैं.

    बनाए गए 90,712 मतदान केंद्र

    चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार में 90,712 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें औसतन प्रति केंद्र 818 मतदाता रजिस्टर्ड हैं. इनमें से 76,801 केंद्र ग्रामीण और 13,911 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं. सभी केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा, मतदाताओं को बेहतर सुविधा देने के लिए 1,350 मॉडल मतदान केंद्र भी तैयार किए गए हैं. सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘मैं भरोसा दिलाना चाहता हूं कि बिहार चुनाव पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण माहौल में कराए जाएंगे.’

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