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    बहराइच: घर में सो रही मासूम बच्ची को मुंह में दबाकर भाग निकला आदमखोर भेड़िया, 15 दिन में 4 बच्चों को खा गया

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    बहराइच: घर में सो रही मासूम बच्ची को मुंह में दबाकर भाग निकला आदमखोर भेड़िया, 15 दिन में 4 बच्चों को खा गया


    बहराइच में अज्ञात आदमखोर के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. बुधवार दोपहर घर में सो रही तीन वर्षीय बच्ची को आदमखोर मुंह में दबाकर भाग निकला. ग्रामीणों ने लाठी डंडे से उसका पीछा किया, लेकिन बच्ची 500 मीटर दूर लहूलुहान अवस्था में पड़ी मिली. आदमखोर बच्ची का एक हाथ पूरी तरह खा गया था. घायल अवस्था में बच्ची का पिता उसे लेकर स्थानीय अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो गई.

    एक वर्ष पहले बहराइच जिले के महसी के इंसानी इलाके में कुछ इसी तरह लगातार भेड़िए के हमले हो रहे थे. अब वही आलम बहराइच के कैसरगंज इलाके पिछले पन्द्रह दिनों से जारी है. अक्सर रात में इंसानी बस्ती में घुसकर बच्चों पर हमला करने वाले आदमखोर ने अब अपना पैटर्न बदलकर दिन में हमला शुरू किया है.

    बुधवार दोपहर कैसरगंज कोतवाली थाना क्षेत्र के मंझारा तौकली गांव के बाबा पटाव मजरे में बाबू लाल की तीन वर्षीय पुत्री सोनी घर में सो रही थी. इसी बीच आदमखोर दबे पांव घर में दाखिल हुआ और सोती हुई बच्ची को मुंह में दबाकर भाग निकला. बच्ची के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीणों संग घर वालों ने लाठी डंडा लेकर उसका पीछा किया, तब तक घर से लगभग 500 मीटर दूर आदमखोर उस बच्ची का एक हाथ पूरी तरह चबाकर लहूलुहान अवस्था में उसे छोड़कर फरार हो चुका था.

    मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने घायल बच्ची को मोटरसाइकिल से स्थानीय अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. सूचना पर अस्पताल पहुंचे बच्ची के पिता बाबू लाल ने बताया कि वह मजदूरी करता है और घर पर नहीं था. मेरी बच्ची को भेड़िया ले गया, उसका मुंह बड़ा था और हम लोग कुछ नहीं कर पा रहे हैं.

    लगातार हो रहे हमले में अब तक चार बच्चों की मौत
    बहराइच में बीते नौ सितंबर को अज्ञात आदमखोर जानवर के हमले में हुई 4 वर्षीय ज्योति की मौत समेत अब तक कुल चार मौतें हो चुकी हैं, और वन विभाग पूरी तरह फेल नजर आ रहा है. वहीं प्रभागीय वनाधिकारी राम सिंह यादव अपने पुराने बयान पर अभी भी कायम हैं कि दो दर्जन से अधिक वन विभाग की टीमें जानवर का पता लगाने व उसे पकड़ने के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटी हैं.

    हमला करने का बदला पैटर्न
    अब तक रात में हमला करने वाला आदमखोर के बुरी तरह हिंसक होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब जानवर रात के बजाय पिछले तीन दिनों से मासूमों को दिन में निशाना बना रहा है. बीती 20 सितंबर को गांधू झाला मंझारा तौकली में दिन के साढ़े दस बजे रक्षाराम के तीन वर्षीय पुत्र अंकुर को उसकी बहन की गोद से जानवर छीनकर फरार हो गया था, जिसकी अभी तक लाश भी नहीं बरामद हुई है. 

    कल दोपहर करीब तीन बजे मंझारा तौकली के बाबा बंगला मजरे के रक्षाराम के तीन वर्षीय पुत्र जो अपने घर में लेटा था, उसे आदमखोर मुंह में दबाकर भाग निकला, लेकिन लोगों की सक्रियता से उसे वह लहूलुहान कर छोड़कर फरार हो गया. वहीं आज भी दोपहर घर में सो रही बाबा पटाव मजरे में बाबू लाल की तीन वर्षीय सोनी पर हमला कर उसे मुंह में दबोच कर फरार हो गया.

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