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    हेल्‍थ-टर्म इंश्‍योरेंस पर GST छूट का लाभ क्‍या लोगों को मिलेगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया जवाब

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    हेल्‍थ-टर्म इंश्‍योरेंस पर GST छूट का लाभ क्‍या लोगों को मिलेगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया जवाब


    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आजतक से बातचीत में कहा कि जीएसटी में नया सुधार दिवाली और छठ से पहले बिहार और पूरे देश के लिए डबल गिफ्ट है. उन्‍होंने हेल्‍थ और टर्म इंश्‍योरेंस पर भी कई बातों को स्‍पष्‍ट किया. इंश्‍योरेंस प्रीमियम भुगतान को GST में पहले 18 फीसदी स्‍लैब में रखा गया था, लेकिन अब नए सुधार के तहत इसे पूरी तरह से छूट दे दी  गई है. 

    ऐसे में सवाल उठ रहा था कि क्‍या इंश्‍योरेंस प्रीमियम भुगतान पर जीएसटी के तहत मिले छूट का लाभ मिलेगा? इसपर स्‍पष्‍ट करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बीमा कंपनियों और इंश्‍योरेंस इंडस्‍ट्री से लेकर बातचीत के बाद ही इसे जीएसटी से छूट दी गई है.  

    इसे लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए कहा गया है. अगर कोई इसे लोगों तक लाभ नहीं पहुंचाता है तो उसपर एक्‍शन लिया जा सकता है. उन्‍होंने कहा कि अगर कोई शिकायत करता है कि उसे जीएसटी रेट कट का लाभ कंपनियों के द्वारा नहीं दिया जाता है तो उस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

    अब बीमा पर 0 टैक्‍स 

    गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को बड़ा ऐलान करते हुए हेल्‍थ-टर्म इंश्‍योरेंस पर प्रीमियम भुगतान को 18 फीसदी स्‍लैब कैटेगरी से हटाकर ‘0’ फीसदी कैटेगरी में शामिल कर दिया, जो 22 सितंबर से लागू होगा. इसके बाद से ही कहा जा रहा था कि इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंचेगा, लेकिन अब वित्त मंत्री ने स्‍पष्‍ट कर दिया है.

    डेली यूज की चीजों में कटौती

    आजतक से बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ज्‍यादातर फूड और किसानों से जुड़े उत्‍पादों पर बड़ी राहत दी गई है. हमने डेली इस्‍तेमाल होने वाली चीजों के दाम में कटौती की है, ताकि आम लोगों को इसका ज्‍यादा फायदा मिल सके. 

    जीएसटी सुधार से सरकार को इतना होगा नुकसान? 

    जीएसटी नए रिफॉर्म के तहत 4 स्‍लैब को हटाकर 2 टैक्‍स स्‍लैब में बदल दिया गया है. अब 5, 12, 18 और 28 फीसदी टैक्‍स स्‍लैब की जगह अब 5 और 18 फीसदी का ही टैक्‍स स्‍लैब रखा जाएगा, जो 22 सितंबर से देश में लागू होगा. इस बड़े बदलाव के कारण अनुमान है कि सरकार के रेवेन्‍यू में 48000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है.  

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