दिल्ली मेट्रो से रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं. भीड़ में सीट मिलना किसी लक्जरी से कम नहीं होता, लेकिन कभी-कभी सीट छोड़ना भी पछतावे की वजह बन जाता है. ऐसा ही एक अनुभव ब्लू लाइन पर सफर कर रहे एक युवक ने किया. उसने अपनी कहानी रेडिट पर लिखी और पोस्ट कुछ ही वक्त में वायरल हो गई।
बुजुर्ग के लिए छोड़ी सीट
युवक ने बताया कि एक स्टेशन पर तीन महिलाएं चढ़ीं. दो करीब पच्चीस से तीस साल की और एक उम्रदराज. वे सीधे उसके पास आईं और कहा कि बुजुर्ग महिला को सीट चाहिए. लहजा थोड़ा कड़क था लेकिन उसने सोचा कि बुजुर्ग हैं तो सम्मान देना जरूरी है. उसने सीट छोड़ दी और खुद खड़ा हो गया. कुछ स्टेशन बाद बगल की सीट खाली हुई. युवक जैसे ही बैठने के लिए बढ़ा, बुजुर्ग महिला ने वहां बैग रख दिया और अपनी साथी को बैठा दिया.
पछतावा होने लगा
युवक ने आगे लिखा कि उस समय उसे बहुत बुरा लगा. उसे पहली बार अफसोस हुआ कि सीट छोड़ी ही क्यों. उसके मन में सवाल उठने लगा कि क्या हर बार सहानुभूति दिखाना सही है या कभी-कभी सख्ती जरूरी है.युवक ने रेडिट पर लोगों से राय भी मांगी कि गलती उसकी थी या सामने वाली महिला ही हक जताने वाली थी.
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा
पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर जमकर बहस शुरू हो गई.एक यूजर ने कहा कि पछताना बिल्कुल स्वाभाविक है और युवक सही सोच रहा है.दूसरे ने लिखा कि उसके साथ भी ऐसा ही अस्पताल में हुआ था, उसने सीट छोड़ी लेकिन महिला ने दूसरी खाली सीट पर बैग रखकर रोक दिया.
कुछ लोगों ने कहा कि यह सामाजिक दबाव की वजह से होता है. अगर वह सीट न देता तो पूरा डिब्बा उसे गलत मानता. कई लोगों ने यह भी कहा कि बुजुर्ग लोग इसे अपना हक समझते हैं, जबकि नई पीढ़ी थोड़ा ज्यादा समझदार है.
एक यूजर ने ट्रिक भी बताया कि जब कोई जबरदस्ती सीट मांगता है तो वह कह देता है कि उसकी सर्जरी हुई है और वह खड़ा नहीं हो सकता. इसके बाद लोग चुपचाप आगे बढ़ जाते हैं.
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