बिहार में महागठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा शनिवार को आरा पहुंची. यात्रा रविवार यानी 31 अगस्त को विश्राम करेगी. जबकि वोटर अधिकार यात्रा का समापन पटना में 1 सितंबर को होगा. आरा में विपक्ष ने शक्ति प्रदर्शन किया. तेजस्वी यादव के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद रहे.
यात्रा के दौरान विपक्ष ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वोटर लिस्ट से नाम काटकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जैसे अवध की जनता ने बीजेपी को हटाया, वैसे ही मगध के लोग भी हटाएंगे.
यात्रा की शुरुआत 17 अगस्त को सासाराम से हुई थी और करीब 1300 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 24 जिलों और 50 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी. इस 14-दिन की यात्रा में राहुल गांधी ने बीजेपी और पीएम मोदी पर लगातार निशाना साधा और जनता को वोट चोरी के खिलाफ सजग रहने की अपील की.
आरा में कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी को बीजेपी कार्यकर्ताओं का विरोध सहना पड़ा, जिन्होंने काले झंडे दिखाए. जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि यह सब केवल चुनावी जुमला है. वहीं, विपक्ष के नेता इसे जनता के अधिकार की रक्षा के प्रयास के रूप में पेश कर रहे हैं.
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यात्रा के दौरान विभिन्न नेताओं और मंत्रियों ने मंच साझा कर जनता को संबोधित किया. तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार की सरकार को चुनौती दी और कहा कि बिहार के लोग बदलाव के लिए तैयार हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस यात्रा ने विपक्ष के सियासी समीकरण और सत्ता के समीकरण पर जोर दिखाया है. हालांकि एनडीए इसे केवल चुनावी रणनीति के रूप में देख रहा है. असली परीक्षा अब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में होगी, जब जनता तय करेगी कि किसे अधिकार मिलेगा और किसे बाहर का रास्ता.
तेजस्वी यादव ने क्या कहा?
आरा में तेजस्वी यादव ने खुद को महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया. आरा में आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी मौजूद थे. तेजस्वी यादव ने अपनी बात से सभी का ध्यान खींचा और नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने नीतीश कुमार को “नकलची” करते हुए जनता से सवाल पूछा कि क्या वे ओरिजिनल मुख्यमंत्री चाहते हैं या डुप्लीकेट?
मंत्री नीरज का राहुल-तेजस्वी पर हमला
बिहार के मंत्री नीरज कुमार बबलू ने कहा कि राहुल और तेजस्वी ये दोनों चाहते है कि राज्य में अराजक स्थिति पैदा हो क्योंकि इनको पता है कि इनका जनाधार खिसक चुका है. कहीं कुछ चुनाव में होने वाला नहीं है. जनता कमर कसके बैठी है कि पुनः एनडीए की सरकार लाएंगे. ये लोग तरह तरह का भ्रम फैलाने की कोशिश करते हैं. पहले तो तरह तरह का भ्रम लोकसभा में फैलाए, इनको कहीं कुछ मिला नहीं. उसके बाद अब इनको लगता है कि विधानसभा में भी मेरा सफाया होने वाला है तो फिर से ये लोग नया नया नौटंकी कर रहे हैं और विशेष समुदाय को पीठ ठोककर के मंच से राष्ट्र के प्रधानमंत्री को गाली दिलवाते हैं. ये काफी दुखद और चिंताजनक है. ऐसे गाली देनेवाले का जुबान काटकर भेज देना चाहिए, क्योंकि काफी अन्याय हुआ है.
यात्रा से क्या मैसेज देने की गई कोशिशि?
इंडिया गठबंधन ने बिहार में इस यात्रा के जरिए एक साथ कई मैसेज देने की कोशिश की है. राहुल और तेजस्वी के साथ अखिलेश के मंच साझा करने पर सवाल उठता है कि क्या बिहार में विपक्ष MY समीकरण से PDA की ओर बढ़ चला है? क्या विपक्ष का फोकस पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक पर है – या फिर ये सिर्फ़ समीकरण साधने की कवायद है?
क्या यात्रा का मकसद पूरा हुआ?
बिहार के आरा में विपक्ष ने मिलकर बीजेपी के खिलाफ बिगुल बजा दिया. लेकिन बिहार की राजनीति में ये पहला बिगुल नहीं है और आख़िरी भी नहीं होगा. असली सवाल बाकी है कि क्या ये यात्रा जनता के अधिकार के लिए निकली थी या नेताओं की राजनीति के अधिकार के लिए? या SIR के खिलाफ निकली यात्रा का मकसद पूरा हुआ? जिस वोट चोरी के नारे को लेकर राहुल निकले थे क्या उसका फायदा बिहार विधानसभा चुनाव में हो सकेगा?
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