नाबालिग लड़की से बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम ने शनिवार को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर किया. यह कदम तब उठाया गया जब हाईकोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने से साफ मना कर दिया. 84 वर्षीय आसाराम को इसी साल 7 जनवरी को पहली बार चिकित्सा आधार पर जमानत मिली थी.
जोधपुर हाईकोर्ट ने अहमदाबाद मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उनकी तबीयत फिलहाल स्थिर है. उन्हें निरंतर अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं है. जस्टिस दिनेश मेहता और विनीत कुमार माथुर की पीठ ने 27 अगस्त की सुनवाई में यह भी कहा कि बार-बार मेडिकल ग्राउंड पर राहत नहीं दी जा सकती.
जस्टिस ने यह भी कहा कि आसाराम ने नियमित मेडिकल जांच नहीं कराई है. दरअसल, पिछले कुछ महीनों में आसाराम अलग-अलग शहरों के अस्पतालों में तो गए, लेकिन कहीं भी उनकी नियमित जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. आसाराम के वकील निशांत बोधा ने दलील दी कि उन्हें 21 अगस्त को एम्स जोधपुर लाया गया था.
यहां डॉक्टरों ने उनकी तबीयत बिगड़ने की बात कही थी. लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी. बताते चलें कि साल 2013 में आसाराम को 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. साल 2018 में जोधपुर की कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
इसके अलावा साल 2023 में गुजरात की एक अदालत ने भी उन्हें एक अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. 12 साल बाद इस साल जनवरी में उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर जमानत दी गई थी. आसाराम को जमानत मिलने के बाद पीड़िता और उसके परिवार ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई थी.
इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उनके घर पर सुरक्षा कड़ी कर दी थी. पीड़िता के पिता और भाई को गनर उपलब्ध कराए गए थे. उनके घर के आसपास निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे. अब आसाराम के वापस जेल लौटने के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है.
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