29 अगस्त 2025 यानी शुक्रवार का दिन मौजूदा वैश्विक राजनीति के लिए सबसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाएगा. आज से लेकर 2 सितंबर तक ऐसा बहुत कुछ होगा, जो पूरी दुनिया की राजनीति को प्रभावित करेगा. इसमें ये तय होगा कि टैरिफ के मुद्दे पर दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियां किस तरफ जाएंगी. ये भी तय होगा कि भारत अपने रिश्तों में जापान, चीन और अमेरिका के साथ कैसे संतुलन बैठाएगा. एससीओ के मंच पर रूस, भारत और चीन के बीच कौन से नए समझौते होंगे. भारत और चीन के रिश्तों में कितनी नरमी आएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग क्या तय करेंगे और क्या भारत चीन के ट्रेडिंग ब्लॉक में शामिल होकर अमेरिका को जवाब देगा? और आखिर में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या एससीओ समिट से अमेरिका पर दबाव बढ़ेगा और आने वाले समय में राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों में दुनिया बदलाव देखेगी.
अब तक राष्ट्रपति ट्रम्प ने ज्यादातर फैसले यही सोचकर लिए कि दुनिया को अमेरिका की हर बात माननी होगी. जो देश उनके फैसलों का विरोध करेगा, उसके खिलाफ राष्ट्रपति ट्रम्प सख्ती से पेश आएंगे और आखिरकार ये दुनिया अमेरिका के इर्द-गिर्द ही चलती रहेगी. लेकिन इस बार अमेरिका की इस मनमानी को चुनौती मिली है. अब रूस, भारत और चीन के बीच सिचुएशन ट्रायंगल बनता दिख रहा है. सबसे बड़ी बात ये है कि भारत अपना हर कदम बहुत सोच समझकर आगे बढ़ा रहा है. ऐसा नहीं है कि हम अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ से विचलित होकर रूस और चीन के खेमे में चले गए हैं. हम अब भी वही कर रहे हैं, जिसे कूटनीति की दुनिया में बैलेंसिंग एक्ट कहते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी 7 साल बाद एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन तो जा रहे हैं, लेकिन इससे पहले वो अभी जापान के दौरे पर हैं. चीन और जापान दोनों के रिश्तों में तनाव रहता है और इस तनाव की वजह है, इंडो पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा. जापान QUAD के मंच पर चीन की मंशा और उसकी विस्तारवादी नीतियों को लेकर चिंता जता चुका है. सोचिए प्रधानमंत्री मोदी चीन जाने से पहले इसी जापान के दौरे पर आए हैं और इसी को कहते हैं बैलेंसिंग एक्ट.
भारत वैश्विक राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा
इस संतुलन को बनाने में हर फैसला हमारा खुद का है. भारत इस वक्त ऐसी स्थिति में है, जहां हर देश के साथ हमारा संतुलन है और हम ये देख रहे हैं कि कहां हमारे हित ज्यादा सुरक्षित हैं. उदाहरण के लिए मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका से भी हमारी बातचीत बंद नहीं हुई है, जापान के साथ भी हम द्विपक्षीय सम्मेलन कर रहे हैं और इसके बाद प्रधानंत्री मोदी चीन में एससीओ समिट में भी शामिल होने वाले हैं. यानी सारे दबावों को खारिज करके भारत अपनी शर्तों पर वैश्विक राजनीति में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है.
अब ये समझते हैं कि जापान, भारत से क्या चाहता है और भारत, जापान से क्या चाहता है.
– IMF के मुताबिक इसी साल भारत की अर्थव्यवस्था ने जापान की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ दिया है. अब जापान दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. दरअसल, जापान चाहता है कि वो भी भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से फायदा उठा सके और इसीलिए अब उसने अगले 10 साल में भारत में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का फैसला किया है. जब ये सारा पैसा भारत की अर्थव्यवस्था और उसकी उत्पादन क्षमता पर खर्च होगा तो इससे भारत में नई फैक्ट्रियां और कारखाने लगेंगे और बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार मिलेगा. इसके अलावा इस निवेश से भारत की अर्थव्यवस्था पर दुनिया का विश्वास और मजबूत होगा.
– उदाहरण के लिए मान लीजिए आप कोई बिज़नेस करते हैं और आपको निवेश की ज़रूरत है, तो आपको ये निवेश तभी मिलेगा, जब आपके ऊपर भरोसा होगा और निवेश करने वाले व्यक्ति को लगेगा कि आपके ऊपर पैसा लगाने से उसे नुकसान नहीं होगा, तो दुनिया भी ऐसे ही चलती है और इस वक्त भारत भी यही भरोसा दुनिया में कमा रहा है.
इन 4 सेक्टर्स में जापान के साथ बढ़ेगा सहयोग
जिन 4 नए सेक्टर में हम जापान के साथ सहयोग बढ़ाने वाले हैं, उनमें पहला है सेमीकंडक्टर चिप्स. दूसरा है क्रिटिकल मिनरल्स. तीसरा सेक्टर है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चौथा सेक्टर है फार्मास्यूटिकल्स यानी दवाइयों का बाज़ार. साल 2024-25 में भारत और जापान के बीच कुल 2 लाख 13 हज़ार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था, जिसमें 1 लाख 59 हज़ार करोड़ रुपये का सामान हमने जापान से खरीदा था, जबकि 52 हज़ार 909 करोड़ रुपये का सामान हमने जापान को बेचा था. हमारा व्यापार घाटा था 1 लाख 3 हज़ार 795 करोड़ रुपये.
कई समझौतों पर हस्ताक्षर
ये तमाम आंकड़े बताते हैं कि अगर टैरिफ के कारण अमेरिका के लिए भारत का निर्यात प्रभावित हो रहा है तो वो जापान में भी अपने सामान को खपा सकता है और हम जापान की कंपनियों और कारखानो को अपने देश में भी ला सकते हैं, जिसका आज प्रधानमंत्री मोदी ने भी दोनों देशों के जॉइंट इकोनॉमिक फोरम में किया है. प्रधानमंत्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, इन्हें पूरी दुनिया के सामने रखा गया है.
पीएम मोदी को गिफ्ट की ‘गुड लक’ की प्रतीक दरुमा डॉल
बता दें कि जापान के एक मंदिर ने प्रधानमंत्री मोदी को एक Doll भेंट की है, जिसे Daruma (दरुमा) Doll कहते हैं. इसे जापान का एक स्मृति चिह्न भी माना जाता है, ये डॉल बोधिधर्म पर आधारित है, जिन्हें ज़ेन (Zen) बौद्ध धर्म का संस्थापक माना जाता है. जापान में उन्हें दरुमा दाइशी (Daruma Daishi) भी कहते हैं. इसे दृढ़ता और सौभाग्य यानी गुड लक का प्रतीक माना गया है और परंपरा के मुताबिक जब कोई लक्ष्य तय किया जाता है तो इसमें इस Doll की एक आंख भरी जाती है और जब ये लक्ष्य पूरा हो जाता है तो इसकी दूसरी आंख को भी भर दिया जाता है. जापान के लोग कहते हैं कि ये स्मृति चिन्ह उन्हें कभी ना हार मानने की भी प्रेरणा देता है और इसका कारण ये है कि इस डॉल का नीचे का आकार गोल होता है, जिसकी वजह से इसे नीचे गिराया भी जाए तो भी ये डॉल वापस उठ खड़ी होती है. जापान में इसके लिए एक कहावत भी बोली जाती है कि सात बार गिरो लेकिन आठवीं बार फिर से उठ खड़े हो जाओ.
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