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    पड़ोसी ग्रीस ने उठाया ऐसा कदम, एर्दोगन को लगी मिर्ची! बदले की कार्रवाई पर उतरा तुर्की

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    पड़ोसी ग्रीस ने उठाया ऐसा कदम, एर्दोगन को लगी मिर्ची! बदले की कार्रवाई पर उतरा तुर्की


    तुर्की के पड़ोसी देश ग्रीस से उसके संबंध हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं और अब ग्रीस एक ऐसा काम करने जा रहा है जिससे संबंधों में और तनाव बढ़ सकता है. ग्रीस समुद्री जीवों की सुरक्षा की कोशिश में दो नेशनल मरीन पार्क स्थापित करने जा रहा है.  ये पार्क भूमध्य सागर में आयोनियन सागर और दक्षिणी साइक्लेड्स में स्थित होंगे जो ग्रीस मेनलैंड के पश्चिम और पूर्व में स्थित एक द्वीप समूह हैं.

    एजियन सागर (भूमध्य सागर का हिस्सा) में एक समुद्री पार्क बनाने के ग्रीक सरकार के फैसले का पिछले साल तुर्की ने विरोध किया था. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से समुद्री सीमाओं और पूर्वी भूमध्य सागर के कुछ हिस्सों में आर्थिक अधिकारों को लेकर मतभेद रहे हैं. इस लेकर समय-समय पर दोनों देशों में विवाद होता रहा है.

    ग्रीक प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘ये पार्क पूरे भूमध्य सागर में सबसे बड़े समुद्री संरक्षित क्षेत्रों में से एक होंगे.’ प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इनसे देश 2030 तक अपने 30% जल क्षेत्र की सुरक्षा के अपने लक्ष्य को समय से पहले पूरा कर सकेगा.

    मित्सोताकिस ने कहा कि दो समुद्री पार्कों की स्थापना का मकसद पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करना, प्रकृति में बैलेंस बहाल करना और समुद्री संरक्षण के लिए एक नया मानक स्थापित करना है.

    तुर्की ने बदले की कार्रवाई की घोषणा की

    मरीन पार्क बनाने के ग्रीस के फैसले से तुर्की को मिर्ची लगी है और उसने भी इसी तरह के प्रोजेक्ट्स शुरू करने की बात कह दी है. तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘एजियन और भूमध्य सागर जैसे बंद या अर्ध-बंद समुद्रों में एकतरफा कार्रवाई से बचना चाहिए.’ उन्होंने आगे कहा कि तुर्की आने वाले दिनों में समुद्री क्षेत्रों में पर्यावरण की रक्षा के उद्देश्य से अपने प्रोजेक्टस की घोषणा करेगा.

    एजियन सागर में बनने वाला पार्क संकटग्रस्त जंगली पौधों और प्रजातियों का घर है जो लगभग 9,500 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा. आयोनियन सागर में स्थित यह पार्क 18,000 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा और इसमें कुछ समुद्री कछुओं जैसे लुप्तप्राय जानवरों के निवास स्थान भी शामिल होंगे.

    मित्सोताकिस ने कहा, ‘ये पार्क लहरों के नीचे जीवों के लिए विशाल घर होंगे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन समुद्री क्षेत्रों के अंदर नीचे की तरफ मछली पकड़ने की हानिकारक प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.’

    ग्रीस और तुर्की के बीच पुराना है समुद्री विवाद

    ग्रीस और तुर्की के बीच एजियन सागर का विवाद सबसे बड़ा विवाद है जो लगातार चलता आया है. एजियन सागर में सैकड़ों छोटे-बड़े द्वीप हैं, जिनमें से अधिकतर ग्रीस के कंट्रोल में हैं. लेकिन तुर्की ग्रीस के कंट्रोल पर आपत्ति जताता आया है खासकर उन द्वीपों को लेकर जो उसके समुद्र तट के बहुत करीब हैं.

    दोनों देशों के बीच साइप्रस का मुद्दा

    ग्रीस और तुर्की के बीच साइप्रस का मुद्दा भी विवाद की बड़ी वजह है. 1974 में जब साइप्रस में ग्रीस समर्थित तख्तापलट हुआ तो तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी भाग पर सैन्य कार्रवाई कर उसे अपने कब्जे में ले लिया.

    उस क्षेत्र में तुर्की के कब्जे को अब तक अंतराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है और केवल तुर्की ही उसे ‘Northern Cyprus’ के नाम से मान्यता देता है. ग्रीस, साइप्रस की सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तुर्की की इस कार्रवाई को अवैध मानते हैं.

    प्राकृतिक संसाधनों पर कंट्रोल के लिए ग्रीस और तुर्की में विवाद

    पूर्वी भूमध्य सागर (Eastern Mediterranean) में गैस और तेल भंडार की खोज के बाद से ग्रीस और तुर्की में तनाव और बढ़ गया है. दोनों ही देश वहां माइनिंग के अधिकारों का दावा करते हैं. दोनों ही देश सागर में एक-दूसरे के रिसर्च को अवैध बताते आए हैं.

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