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    भारत का ‘शुभ-आरंभ’… अंतरिक्ष में शुभांशु शुक्ला ने किए 7 परीक्षण, जानें- गगनयान मिशन में कैसे आएंगे काम

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    भारत का ‘शुभ-आरंभ’… अंतरिक्ष में शुभांशु शुक्ला ने किए 7 परीक्षण, जानें- गगनयान मिशन में कैसे आएंगे काम


    भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) स्पेस स्टेशन से वापस धरती पर लौट आए हैं. वे 18 दिन तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रहने के बाद पृथ्वी पर लौटे हैं. मंगलवार, दोपहर 3 बजे (भारतीय समयानुसार) स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में उतरा. ISRO ने शुभांशु शुक्ला की इस अंतरिक्ष यात्रा पर करीब 550 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. शुभांशु का अंतरिक्ष अनुभव भारत के गगनयान मिशन में मदद करेगा.

    शुभांशु शुक्ला ने कहा, “मैं इस मिशन के जरिए देश के बच्चों को प्रेरित करना चाहता हूं. अगर मैं एक बच्चे को भी प्रेरित कर पाया तो मैं समझूंगा कि मैं सफल रहा.”

    मिशन की कामयाबी और देश का उत्साह

    अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, पृथ्वी पर सुरक्षित लौट आए और यकीन मानिए वो अपने मिशन में पूरी तरह से कामयाब रहे हैं और इसको लेकर देश में खास उत्साह दिखा. उनके मिशन को लेकर बच्चों में जिज्ञासा थी. शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष से धरती पर लौटने पर सारे हिंदुस्तान की निगाह लगी हुई थी. जैसे ही ये तस्वीर आई, देश ने राहत की सांस लेने के साथ गर्व भी महसूस किया.

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    धरती पर लौटने के बाद शुभांशु की खुशी…

    धरती पर लौटने पर शुभांशु शुक्ला के चेहरे पर गर्व और होठों पर मुस्कुराहट दिखी. कैप्सूल से बाहर निकलते ही शुभांशु ने हाथ हिलाकर अभिवादन किया. करीब 23 घंटे के सफर के बाद भारतीय समय के मुताबिक, दोपहर 3 बजे अमेरिका के कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई. इसे स्प्लैशडाउन कहते हैं. पैराशूट की मदद से ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया के तट पर उतरा. पृथ्वी पर वापसी के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को पानी से निकाला गया.

    शुभांशु शुक्ला का स्पेसक्राफ्ट ड्रैगन धरती की ओर 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आया. जब यह बहुत करीब आया तो स्पीड कम कर दी गई. कैप्सूल की बाहरी सतह पर हीट शील्ड 2000 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहन कर रही थी. शुभांशु ने 1 करोड़ 39 लाख किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया, जो अपने आप में ऐतिहासिक है.

    Shubhanshu shukla

    स्पेस स्टेशन से लौटने की पूरी प्रक्रिया…

    शुभांशु शुक्ला सहित चारों अंतरिक्ष यात्री एक दिन पहले शाम 4.45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे. ये सभी 26 जून को भारतीय समय के मुताबिक शाम 4 बजकर 1 मिनट पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे थे. स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से जुड़े ड्रैगन कैप्सूल में इन्होंने कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी. शुभांशु की इस कामयाबी में इसरो ने भी अहम भूमिका निभाई. इसरो ने इस मिशन के लिए करीब 550 करोड़ रुपये खर्च किए थे.

    यह भी पढ़ें: शुभांशु शुक्ला ने स्पेस स्टेशन पर 18 दिनों तक क्या-क्या किया… कौन-कौन से प्रयोग किए?

    प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं

    शुभांशु की वापसी पर प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का उनकी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा से पृथ्वी पर वापसी के लिए स्वागत करता हूं. शुभांशु ने अपने समर्पण, साहस से अरबों सपनों को प्रेरित किया है. ये हमारी अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की दिशा में एक मील का पत्थर है.”

    भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला

    शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय हैं. उनसे पहले साल 1984 में राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी और वो वहां 8 दिन तक रहे थे. अब जबकि शुभांशु अंतरिक्ष में कई तरह के प्रयोग करने के बाद धरती पर लौट आए हैं, तो देश के कई वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे भारत के सपनों को आकार देने में मदद मिलेगी.

    वैज्ञानिकों की राय और उम्मीद…

    विलियम सेल्वमूर्ति (पूर्व डीजी DRDO) और खगोल वैज्ञानिक अमिताभ ने कहा कि शुभांशु शुक्ला के मिशन का भविष्य में फायदा मिलेगा. शुभांशु को भारत आने में अभी वक्त लगेगा और हर किसी को उनके आने का इंतजार है.

    लखनऊ के स्कूल में खुशी का माहौल

    लखनऊ के जिस स्कूल में शुभांशु शुक्ला ने पढ़ाई की थी, उसी सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में उनके परिवार के साथ स्कूली बच्चों ने इस ऐतिहासिक पल को देखा. जैसे ही शुभांशु की सफल लैंडिंग हुई, लोग खुशी से झूम उठे. शुभांशु के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू आ गए.

    दिल्ली के CSIR-NPL ऑडिटोरियम में भी शुभांशु की रिटर्न जर्नी का सीधा प्रसारण दिखाया गया. भारत के लिए शुभांशु शुक्ला का ये अंतरिक्ष मिशन केवल रिकॉर्ड बनाने का मौका नहीं था. ये भविष्य की तैयारी थी. ये मिशन भारत के खुद के दम पर अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने के सपने का आधार बनेगा. यहीं से भारत के गगनयान मिशन का रास्ता निकलेगा.

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    दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड…

    शुभांशु शुक्ला ने इस मिशन पर दो रिकॉर्ड बनाए. पहला, वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय नागरिक बन गए. दूसरा, राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में कदम रखने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय नागरिक हैं. उनकी यह यात्रा राकेश शर्मा द्वारा 1984 में उड़ान भरने के 41 साल बाद हुई.

    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर शुभांशु शुक्ला ने भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन को आगे बढ़ाने में मदद के लिए 7 खास परीक्षण किए. इनमें मांसपेशियों के नुकसान को डिकोड करने, मस्तिष्क-कंप्यूटर इंटरफेस विकसित करने और अंतरिक्ष में हरे चने और मेथी के बीज को अंकुरित करने के प्रयोग शामिल थे.

    Axiom-4 मिशन से मिले अनुभव

    Axiom-4 मिशन अपने साथ कई डेटा और अनुभव लेकर लौटा है कि अगर इंसान को स्पेस में लंबा वक्त रहना है तो वहां खाने-पीने का क्या इंतजाम हो सकता है. इस मिशन से स्पेस साइंटिस्ट को स्पेस में इंसान के दिमाग के ब्लड सर्कुलेशन को समझने का नजरिया भी मिला.

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    मेडिकल जांच और रिहैबिलिटेशन

    शुभांशु भले ही धरती पर लौट चुके हों, लेकिन उनकी चुनौतियां अभी कम नहीं हुई हैं. शुभांशु शुक्ला अगले सात दिनों तक रिहैबिलिटेशन में रहेंगे और शरीर को धरती के गुरुत्वाकर्षण के हिसाब से ढालने की कोशिश करेंगे. इस दौरान मेडिकल टीम उनकी सेहत का ध्यान रखेगी.

    शुभांशु शुक्ला का ये मिशन सिर्फ अंतरिक्ष यात्रा नहीं है. ये भारत की आकांक्षाओं, वैज्ञानिक उपलब्धियों और आत्मविश्वास की कहानी है, जो भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा. 

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