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    उद्धव-राज को तमिलनाडु CM स्टालिन का सपोर्ट, बोले- हिंदी थोपे जाने के खिलाफ एकजुट हों

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    उद्धव-राज को तमिलनाडु CM स्टालिन का सपोर्ट, बोले- हिंदी थोपे जाने के खिलाफ एकजुट हों


    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने उद्धव और राज ठाकरे का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और यहां की जनता ने पीढ़ियों से हिंदी ‘थोपने’ के खिलाफ जो संघर्ष किया है, वह अब राज्य की सीमाओं को पार कर महाराष्ट्र में भी जोरदार विरोध के रूप में उभरा है.

    स्टालिन ने  X पर एक पोस्ट में कहा कि भाजपा यह शर्त रखती है कि तमिलनाडु में हिंदी तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाए. तभी केंद्र सरकार फंड देगी, अब दूसरी बार महाराष्ट्र में जनता के आक्रोश के चलते बीजेपी पीछे हटने को मजबूर हुई है, जहां खुद उनकी ही सरकार है.

    स्टालिन ने कहा कि मुंबई में आज भाई उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में हिंदी ‘थोपने’ के खिलाफ हुई ‘विजय रैली’ में जोशीले भाषणों और जनज्वार ने हमें बेहद उत्साहित किया है. मैं जानता हूं कि केंद्र सरकार, जो केवल हिंदी और संस्कृत के प्रचार-प्रसार में लगी रहती है, राज ठाकरे के इन 2 तीखे सवालों का कोई जवाब नहीं दे सकती.

    पहला- उत्तर प्रदेश और राजस्थान में तीसरी भाषा के रूप में क्या पढ़ाया जाता है?

    दूसरा- जब हिंदीभाषी राज्य पिछड़े हुए हैं, तो फिर प्रगतिशील गैर-हिंदीभाषी राज्यों पर हिंदी क्यों थोपी जा रही है?

    सीएम स्टालिन ने केंद्र से पूछे सवाल

    सीएम स्टालिन ने पूछा कि क्या केंद्र सरकार बदले की भावना से तमिलनाडु के बच्चों की शिक्षा के लिए समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha Abhiyan) के तहत 2,152 करोड़ रुपये की फंडिंग रोकने का रवैया बदलेगी? क्या वह तुरंत यह धनराशि जारी करेगी, जो तमिलनाडु का कानूनी हक़ है?

    ‘महाराष्ट्र में उठी आवाज़ आंखें खोलने के लिए काफी’ 

    तमिलनाडु के सीएम ने कहा कि राज्य की जनता का यह संघर्ष केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि बौद्धिक, तार्किक और भारत की सांस्कृतिक विविधता की रक्षा के लिए है.। यह नफ़रत से नहीं, अधिकार और सम्मान की भावना से प्रेरित है. जो लोग बिना इतिहास समझे ये कहते हैं कि ‘हिंदी सीखो, नौकरी मिलेगी’, उन्हें अब सुधरने की ज़रूरत है. महाराष्ट्र में उठी यह आवाज़ उनकी आंखें खोलने के लिए काफी है.

    भाजपा को प्रायश्चित करना होगा: स्टालिन

    स्टालिन ने कहा कि हम ये भाषायी भेदभाव, तमिल भाषा की उपेक्षा और कीलाड़ी जैसी सभ्यताओं को नज़रअंदाज़ करने वाला व्यवहार और अधिक सहन नहीं करेंगे. भाजपा को तमिल और तमिलनाडु के साथ किए गए विश्वासघात का प्रायश्चित करना होगा. अगर वह नहीं सुधरी, तो तमिलनाडु एक बार फिर उन्हें ऐसा सबक सिखाएगा जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे. आइए, एकजुट हों. तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा.

    —- समाप्त —-



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