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    ‘अब तो चोकर्स मत कहें… जीत के बाद भावुक हुए शतकवीर मार्करम, टेम्बा बावुमा ने बताया- कैसे कंगारुओं ने उन पर कसा था तंज

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    ‘अब तो चोकर्स मत कहें… जीत के बाद भावुक हुए शतकवीर मार्करम, टेम्बा बावुमा ने बताया- कैसे कंगारुओं ने उन पर कसा था तंज


    आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) के तीसरे चक्र (2023-25) के फाइनल में साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से पराजित किया. लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर हुए मुकाबले में साउथ अफ्रीका को जीत के लिए 282 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने खेल के चौथे दिन हासिल कर लिया. साउथ अफ्रीका ऐसी तीसरी ऐसी टीम बन गई, जिसने वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का खिताब जीता है. न्यूजीलैंड ने पहले चक्र और ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे चक्र का खिताब अपने नाम किया था.

    चोकर्स का टैग हटा, बावुमा ने ऑस्ट्रेलिया टीम पर किया बड़ा खुलासा

    इस खिताबी जीत के साथ ही साउथ अफ्रीकी टीम ने खुद पर लगा चोकर्स का टैग भी हटाया है. नॉकआउट मैचों में हारने की आदत के चलते प्रशंसक लंबे समय से साउथ अफ्रीकी टीम को ‘चोकर्स’ नाम से ट्रोल कर रहे थे. यहां तक कि डब्यूटीसी फाइनल के दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाड़ी भी साउथ अफ्रीकी प्लेयर्स को स्लेज करने में लगे थे. 

    चौथे दिन जब साउथ अफ्रीका को जीत के लिए सिर्फ 69 रन चाहिए थे और उसके 8 विकेट शेष थे, तब भी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि वे उन्हें ऑलआउट कर सकते हैं. कप्तान टेम्बा बावुमा ने खुलासा किया है कि फाइनल के चौथे दिन (14 जून) ऑस्ट्रेलिया के कुछ खिलाड़ियों ने उन्हें चिढ़ाने के लिए ‘चोक’ (choke) शब्द का इस्तेमाल किया.

    टेम्बा बावुमा, फोटो: ICC

    टेम्बा बावुमा ने बीबीसी टेस्ट मैच स्पेशल को बताया, “आज सुबह फिर से हम पर ‘चोकर्स’ वाला ठप्पा लगाया गया. जब हम बल्लेबाजी कर रहे थे, तो हमने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को ‘चोक’ शब्द का इस्तेमाल करते सुना. उनके एक खिलाड़ी ने कहा कि हम अब भी ऑलआउट हो सकते हैं. मैंने वो बात जरूर सुनी थी.”

    मार्करम ने दिया भावुक कर देने वाला बयान

    ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ एडेन मार्करम को उम्मीद है कि ‘चोकर्स’ शब्द का प्रयोग अब कभी साउथ अफ्रीका के लिए नहीं होगा. एडेन मार्करम ने मैच के बाद कहा, ‘ये शब्द (चोक) दोबारा कभी न सुनना पड़े, यही अच्छा होगा. इस बार हमने काम पूरा किया और उस टैग से छुटकारा पाया, ये हमारी टीम के लिए बड़ी बात है.’

    साउथ अफ्रीकी टीम 27 साल बाद आईसीसी खिताब जीतने में सफल रही है. इससे पहले उसने अपना पहला आईसीसी खिताब साल 1998 (विल्स इंटरनेशनल कप) में जीता था. साउथ अफ्रीकी टीम की डब्यूटीसी फाइनल की जीत में एडेन मार्करम और कप्तान टेम्बा बावुमा की अहम भूमिका रही. मार्करम ने रनचेज में 136 और बावुमा ने 66 रन बनाए. दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 147 रनों की पार्टनरशिप हुई, जिसने मैच का रुख पूरी तरह से साउथ अफ्रीकी टीम की ओर मोड़ दिया.



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