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    जापान का रेजिलिएंस अंतरिक्ष यान हुआ क्रैश? चांद पर लैंडिंग से ठीक पहले टूटा संपर्क

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    जापान का रेजिलिएंस अंतरिक्ष यान हुआ क्रैश? चांद पर लैंडिंग से ठीक पहले टूटा संपर्क


    जापान के बहुप्रतीक्षित चंद्र मिशन को बड़ा झटका लगा है. देश की निजी अंतरिक्ष कंपनी iSpace द्वारा निर्मित चंद्रयान ‘रेज़िलिएंस’ (Resilience) चंद्रमा के Mare Frigoris क्षेत्र में लैंडिंग के प्रयास के दौरान संभवतः दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. हालांकि अभी तक मिशन की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लैंडिंग के आखिरी फेज के दौरान अचानक संपर्क टूट जाने से चंद्रयान के क्रैश होने की आशंका बढ़ गई है.

    मिशन के दौरान क्या हुआ?

    रेज़िलिएंस यान ने 100 किलोमीटर के चांद के ऑर्बिट से उतरना शुरू किया था. यह जापान का पहला निजी चंद्रयान था, जो चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने जा रहा था. लैंडिंग से कुछ मिनट पहले तक सब कुछ सामान्य था, यान ने गति कम की और सतह के 5 किलोमीटर ऊपर pitch up maneuver भी सफल रहा. लेकिन जैसे ही यान सतह के और करीब पहुंचा, सभी टेलीमेट्री डेटा अचानक बंद हो गए, और iSpace का लाइवस्ट्रीम भी बंद हो गया.

    हैम रेडियो ऑपरेटरों ने भी की पुष्टि

    दुनियाभर के हैम रेडियो ऑपरेटरों ने भी उस समय यान से सिग्नल का टूटना रिकॉर्ड किया, जो लैंडिंग के अनुमानित समय से मेल खाता है.

    iSpace का पहला प्रयास भी हुआ था नाकाम

    यह iSpace का दूसरा चंद्र मिशन था. इससे पहले 2023 में किया गया पहला प्रयास भी संपर्क टूटने के बाद क्रैश हो गया था.

    अब तक क्या कहा गया?

    iSpace की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है. कंपनी ने केवल इतना कहा है कि वे यह पुष्टि करने की प्रक्रिया में हैं कि यान लैंड हुआ या क्रैश. कंपनी के सीईओ तकाशी हाकामादा ने मिशन से पहले कहा था कि यह मिशन चंद्र संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था (cislunar economy) की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा.

    Resilience

    क्यों था यह मिशन अहम?

    रेज़िलिएंस यान में विज्ञान से जुड़ी सामग्री, एक छोटा रोवर और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के उपकरण भेजे गए थे. सफल होने पर यह चंद्रमा पर उतरने वाला जापान का पहला निजी यान बन जाता.

    अब आगे क्या?

    iSpace ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है, विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना चंद्रमा पर उतरने की तकनीकी जटिलताओं को दर्शाती है और निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ा सबक भी है.



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