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    मां को कैंसर जैसी बीमारी से निजात दिलाने के लिए बेटे ने पैदल की 120 KM की कांवड़ यात्रा

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    मां को कैंसर जैसी बीमारी से निजात दिलाने के लिए बेटे ने पैदल की 120 KM की कांवड़ यात्रा


    यूपी के औरैया में सावन महीने के पहले सोमवार को एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने लोगों को भावुक कर दिया. कन्नौज के रहने वाले दो बेटों ने अपनी बीमार मां की सेहत की कामना के साथ भगवान शिव की अराधना करने का संकल्प लिया और मां की लंबी उम्र और स्वास्थ्य लाभ के लिए 121 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा नंगे पैर पूरी की. बेटों की इस श्रद्धा और सेवा भावना ने लोगों को श्रवण कुमार की याद दिला दी.

    दोनों भाइयों ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर कन्नौज से गंगाजल लिया और पैदल चलते हुए औरैया के प्रसिद्ध देवकली मंदिर पहुंचे. यहां भगवान शंकर पर जलाभिषेक कर उन्होंने मां के स्वास्थ्य की कामना की. खास बात यह रही कि यह पूरी यात्रा उन्होंने नंगे पैर तय की, जो कि एक आम भक्त के लिए भी अत्यंत कठिन कार्य है.

    इलाज सफल होने की कामना

    उनकी मां कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं, ऐसे में बेटों ने डॉक्टरों के साथ-साथ भगवान शंकर से भी मां की लंबी उम्र और शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की. यह कांवड़ यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान थी, बल्कि एक बेटे की उस श्रद्धा की प्रतीक थी जो आज के दौर में दुर्लभ होती जा रही है.

    बेटों ने कहा, ‘हमने न केवल मां के लिए जलाभिषेक किया बल्कि भगवान से यही मन्नत मांगी कि मां का इलाज सफल हो और वह जल्दी ठीक हो जाएं, उनके साथ चल रहे दोस्तों ने भी भावनात्मक रूप से उन्हें हर मोड़ पर सहयोग किया.

    श्रद्धालुओं ने की दोनों बेटों की तारीफ

    सावन मास में भगवान शिव को जल अर्पित करने का विशेष महत्व होता है और भक्त मानते हैं कि सच्चे मन से की गई पूजा अर्चना से भोलेनाथ भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं. इस आस्था के साथ दोनों भाइयों की यह यात्रा न केवल भक्ति का प्रतीक बनी बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है. इस घटना को देखने वाले ग्रामीणों और मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में जब लोग अपने माता-पिता को बोझ समझते हैं, ऐसे बेटों का यह कदम पूरे समाज के लिए उदाहरण है.

     

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