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    Air India Plane Crash: MAYDAY… MAYDAY… MAYDAY, क्रैश से पहले पायलट ने दिया था सिग्नल लेकिन…

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    Air India Plane Crash: MAYDAY… MAYDAY… MAYDAY, क्रैश से पहले पायलट ने दिया था सिग्नल लेकिन…


    गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार को बड़ा विमान हादसा हुआ. अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का विमान टेकऑफ करते ही क्रैश कर गया, जिस वक्त ये हादसा हुआ उस वक्त विमान में करीब 242 लोग सवार बताए जा रहे हैं. इस बीच अब विमान हादसे को लेकर कई तरह की जानकारी सामने आ गई है, जिसमें सबसे अहम जानकारी ये भी है कि विमान के पायलट की ओर से क्रैश से ठीक पहले करीबी एटीसी को सिग्नल भेजा गया था, जो कि खतरे का अंदेशा बता रहा था और इसी के कुछ पल के बाद विमान क्रैश कर गया.

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    डीजीसीए की ओर से विमान हादसे के बाद विस्तार से जानकारी दी गई है. इसके मुताबिक, 12 जून 2025 को एयर इंडिया का विमान B787 जो कि अहमदाबाद से गैटविक (AI-171) जा रहा था, टेकऑफ के तुरंत बाद ही क्रैश कर गया. इस विमान में कुल 242 लोग सवार थे, जिसमें 2 पायलट और 10 केबिन क्रू शामिल हैं. इस एयरक्राफ्ट को कैप्टन सुमित साभरवाल चला रहे थे, जबकि उनके साथ फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर थे. सुमित साभरवाल को 8200 घंटे फ्लाइट उड़ाने का अनुभव था, जबकि क्लाइव का अनुभव 1100 फ्लाइट आवर का था. 

    सबसे अहम जानकारी जो दी गई है, वो ये है कि अहमदाबाद एअरपोर्ट के रनवे 23 से इस विमान ने दोपहर 1.39 पर उड़ान भरी थी. उड़ान भरते ही इसने करीबी एटीसी को MAYDAY कॉल दी थी, लेकिन इसके बाद विमान की ओर से एटीसी को कोई सिग्नल नहीं दिया गया. उड़ान के कुछ सेकंड बाद ही विमान एअरपोर्ट परिसर के बाहर गिर गया.

    क्या होती है MAYDAY Call? 

    किसी भी फ्लाइट में ‘मेडे कॉल’ (Mayday Call) एक इमरजेंसी मैसेज होता है, जो पायलट उस वक्त देता है जब विमान किसी गंभीर संकट में हो और यात्रियों या क्रू की जान को खतरा हो. जैसे कि विमान का इंजन फेल होना, विमान में आग लगना, हवा में टकराव का खतरा, या हाईजैक जैसी स्थिति बन जाए. इस कॉल के ज़रिए कोई भी पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और नज़दीकी विमानों को अलर्ट करता है कि प्लेन को तुरंत मदद की ज़रूरत है. इसे प्लेन के रेडियो पर तीन बार बोला जाता है—”Mayday, Mayday, Mayday” ताकि साफ हो जाए कि यह मज़ाक नहीं बल्कि असली संकट है.

    जानकारी के मुताबिक, जैसे ही Mayday Call दिया जाता है कंट्रोल रूम उस विमान को प्राथमिकता देता है और सभी संसाधनों को उसकी मदद में लगा देता है, जैसे इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत, रनवे खाली कराना, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड तैयार रखना. ‘मेडे’ शब्द फ्रेंच के “m’aider” से आया है, जिसका मतलब होता है मेरी मदद करो. ध्यान देने वाली बात ये है कि यदि हालात बहुत ज्यादा गंभीर न हो लेकिन चिंता की हो, तब पायलट पैन-पैन (Pan-Pan) कॉल करता है, जो ‘मेडे’ से कम गंभीर मानी जाती है.



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