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    अमेरिका का कोई भी हमला ‘आखिरी गलती’ होगी, ईरान ने पॉलिसी बदली, अब फर्स्ट अटैक भी कर सकता है तेहरान!

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    अमेरिका का कोई भी हमला ‘आखिरी गलती’ होगी, ईरान ने पॉलिसी बदली, अब फर्स्ट अटैक भी कर सकता है तेहरान!


    ईरान और अमेरिका एक नए टकराव के लिए तैयार हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा था कि अगर तेहरान शांति पूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों को मारना बंद नहीं करता है तो यूएस उनकी मदद के लिए आएगा. ट्रंप ने कहा कि ईरान को जवाब देने के लिए अमेरिका ‘लॉक्ड’ और ‘लोडेड’ है. 

    अमेरिकी धमकियों को देखते हुए ईरान ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने बयान जारी कर कहा है कि अगर अमेरिका या इजराइल यहां चल रहे प्रोटेस्ट्स का फायदा उठाकर ईरान की सुरक्षा को खतरा पहुंचाते हैं, तो ईरान पहले ही प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक (पूर्व-निवारक हमले) करेगा. 

    सबसे खास बात यह है कि ईरान ने कहा है कि वह हमला होने का इंतजार नहीं करेगा बल्कि पहले ही कार्रवाई कर सकता है. ईरान की सेना को स्टैंडबाय पर रखा गया है, और अमेरिकी बेस को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है. 

    तेहरान टाइम्स की 6 जनवरी 2026 की रिपोर्ट  में कहा गया है कि ईरान अब “स्ट्रैटेजिक पेशेंस” (धैर्यपूर्ण नीति) से हट रहा है. यदि अमेरिका या इजराइल कोई नया आक्रमण करते हैं, तो ईरान इसे उनका “आखिरी गलती” बनाने के लिए सबसे प्रभावी और निर्णायक उपायों का उपयोग करेगा. पहले की तरह सीमित जवाब नहीं दिया जाएगा. रिपोर्ट में उल्लेख है कि ईरान ने तय किया है कि कोई भी नया अवैध आक्रमण अंतिम होना चाहिए, और इसके लिए सबसे मजबूत विकल्प तैयार हैं. 

    ईरान की इस नीति को पिछले साल हुए 12 दिनों की लड़ाई के बाद अहम बदलाव माना जा रहा है.

    तेहरान टाइम्स ने लिखा कि ट्रंप को लगता है कि प्रदर्शन ईरान को कमजोर कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये छोटे हैं और सरकार ने उन्हें कंट्रोल कर लिया है. यदि दुश्मन गलती करते हैं, तो उनके लिए “नर्क के द्वार” खुल जाएंगे. 

    सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पास सुरक्षा की जिम्मेदारी

    ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ईरान का एक प्रमुख नीति-निर्धारण निकाय है जो देश की सुरक्षा, रक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर विचार करती है. यह परिषद ईरान के संविधान के अनुसार स्थापित है और राष्ट्रपति के नेतृत्व में कार्य करती है. इसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई, राष्ट्रपति, सशस्त्र बलों के प्रमुख, विदेश मंत्री और खुफिया प्रमुख जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं. 

    एक बयान में काउंसिल ने घोषणा की कि वह अब सिर्फ़ जवाबी कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखेगी; बल्कि अगर उसे लगता है कि दुश्मन ईरान को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता है, तो वह पहले हमला करेगी. 

    काउंसिल ने कहा है कि, “अंतर्राष्ट्रीय कानून के स्वीकृत सिद्धांतों का साफ़ उल्लंघन करते हुए धमकी भरी बयानबाजी और दखल देने वाली टिप्पणियों को दोहराकर और तेज़ करके,” अमेरिका और इजरायल ” ईरान को तोड़ने और देश की नींव को नुकसान पहुंचाने के मकसद से एक सोची-समझी रणनीति अपना रहे हैं.”

    ईरान के पास अमेरिका पर हमले करने के लिए क्या-क्या विकल्प है?

    ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन्स हैं, जो मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकती हैं. 2025 में अमेरिकी स्ट्राइक्स के जवाब में ईरान ने इन मिसाइलों का सीमित उपयोग किया था. लेकिन तब ईरान फुल स्केल वार की ओर नहीं जा रहा था. 

    इधर ईरान के पास हाइपरसोनिक मिसाइलें होने का दावा तो है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और पश्चिमी विश्लेषकों में इस पर काफी संदेह है. वहीं, सुपरसोनिक (Mach 1 से Mach 5 तक) क्रूज मिसाइलों की तकनीक ईरान ने विकसित की है, और कुछ मॉडल टेस्टिंग या डेवलपमेंट स्टेज में हैं. 

    ईरान का दावा है कि फतह-1 मिसाइल  Mach 13-15 तक की स्पीड पहुंचती है, और इसकी रेंज 1,400 km तक है. ये मिसाइलें वायुमंडल के अंदर-बाहर मैन्यूवर कर सकती है, जिससे मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती हैं. 2024-2025 में इजराइल पर हमलों में इसका इस्तेमाल होने के दावे हैं. लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है. 

    अगर फतह-2 मिसाइल की बात करें तो ये ज्यादा एडवांस्ड, ग्लाइड व्हीकल से लैस है. लेकिन अभी ये ऑपरेशनल नहीं मानी जाती हैं. 
     

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