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    ‘मोदी की तरह पॉपुलर नहीं हैं ट्रंप’, इयान ब्रेमर बोले- बदले जा सकते हैं US राष्ट्रपति के फैसले

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    ‘मोदी की तरह पॉपुलर नहीं हैं ट्रंप’, इयान ब्रेमर बोले- बदले जा सकते हैं US राष्ट्रपति के फैसले


    वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी कार्रवाई में गिरफ्तारी के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है. इस घटनाक्रम को अमेरिका के लिए बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है, लेकिन मशहूर जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर इससे मिलने वाले लॉन्ग टर्म फायदे को लेकर आशंकित नजर आते हैं. इंडिया टुडे से बातचीत में ब्रेमर ने कहा कि व्हाइट हाउस को भले ही फिलहाल राजनीतिक फायदा मिलता दिखे, लेकिन ट्रंप के सत्ता से जाने के बाद हालात पूरी तरह बदल सकते हैं.

    ब्रेमर ने साफ कहा, “अगला राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा किए गए कई फैसलों को पलट सकता है. यह चीन के शी जिनपिंग जैसा मामला नहीं है. ना ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा, जिन्होंने लोकतंत्र में रहते हुए 10 साल से ज्यादा समय तक देश चलाया है और जिनकी लोकप्रियता मजबूत है. यह ट्रंप हैं, जो काफी अलोकप्रिय हैं, 80 साल के हैं और तीन साल में सत्ता से बाहर हो जाएंगे.”

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    ब्रेमर ने अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था की तुलना चीन, रूस और भारत से करते हुए कहा कि इन देशों में नेतृत्व की निरंतरता देखने को मिलती है, जबकि अमेरिका में हर चार साल में सत्ता परिवर्तन होता है. इससे नीतियों में स्थिरता नहीं बन पाती और बड़े फैसलों का असर दिखने में समय लगता है.

    ‘ट्रंप के उत्तराधिकारी उनके फैसले को बदल सकते हैं’

    ब्रेमर के मुताबिक, जिस तरह ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति की कई नीतियों को खत्म कर दिया था, उसी तरह उनका उत्तराधिकारी भी ट्रंप के फैसलों को बदल सकता है. ऐसे में मादुरो की गिरफ्तारी को अमेरिका की स्थायी रणनीतिक सफलता मानना जल्दबाजी होगी.

    वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर बात करते हुए ब्रेमर ने कहा, “तेल की बात करें तो वेनेजुएला इस समय करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन कर रहा है, जबकि पहले यह आंकड़ा 30 लाख बैरल प्रतिदिन हुआ करता था. उत्पादन बढ़ाने के लिए राजनीतिक स्थिरता बेहद जरूरी है.”

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    ‘तेल कंपनियों को भरोसा दिलाना होगा’

    ब्रेमर ने आगे कहा, “इसके लिए ऐसा आर्थिक माहौल भी चाहिए, जिस पर तेल कंपनियां भरोसा कर सकें. उन्हें यह विश्वास होना चाहिए कि तेल उत्पादन मुनाफे वाला होगा, जबकि इस समय वैश्विक ऊर्जा कीमतें भी काफी नीचे हैं.”

    ब्रेमर के अनुसार, वैश्विक तेल कीमतें, वेनेजुएला की राजनीतिक स्थिरता और ट्रंप के बाद अमेरिका की नीति ही तय करेगी कि कराकस के विशाल तेल भंडार से अमेरिका को वास्तव में कोई दीर्घकालिक फायदा मिलेगा या नहीं.

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