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    TV का मशहूर एक्टर, डिप्रेशन-पैनिक अटैक से रिस्क में आई लाइफ, बोला- बहुत बुरा…

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    TV का मशहूर एक्टर, डिप्रेशन-पैनिक अटैक से रिस्क में आई लाइफ, बोला- बहुत बुरा…


    टीवी और फिल्मों में अपनी पावरफुल परफॉर्मेंस के लिए जाने गए सुधांशु पांडे ने एक इंटरव्यू में अपनी पर्सनल लाइफ पर खुलकर बात की. बताया कि उनकी लाइफ में भी एक ऐसा फेज आया था, जहां वो टूट गए थे. डिप्रेशन का शिकार हुए थे. सिर्फ इतना ही नहीं, लाइफ के उस फेज के बाद उनकी जिंदगी बदल गई थी. 

    सुधांशु का छलका दर्द
    सुधांशु पांडे ने कहा- मुझे पैनिक अटैक्स आते ते. डॉक्टर्स तक पता नहीं लगा पा रहे थे कि आखिर मुझे हो क्या रहा है. पर मैंने भरोसे, सेल्फ अवेयरनेस और बातचीत से खुद को ठीक किया. मुझे आज लगता है कि वो फेस मेरी लाइफ का अच्छा था, क्योंकि मैं उसमें काफी सारी चीजें सीख पाया. 

    अपनी मेंटल हेल्थ के बारे में बात करते हुए सुधांशु ने कहा- मैं किसी चीज से डील कर रहा था. मैं समझ नहीं पा रहा था कि आखिर मुझे हो क्या रहा है. वो चीजें खराब होती रहीं. डॉक्टर्स अंदाजा नहीं लगा पा रहे थे कि मुझे क्या हो रहा है. मेरा ईसीजी हुआ. अस्पताल गया और वहां से वापस आया. एक पॉइंट ऐसा आया ता, जहां मैं सही से सांस नहीं ले पा रहा था. मुझे पैनिक अटैक आ रहे थे. कुछ सेकेंड के लिए ऐसा हुआ, लेकिन मैं जिंदगी के डार्क फेज में था. सबसे डार्क में. मैं अपनी आंखों से दुनिया में खुद को अकेला खड़ा देख रहा था. 

    मैं फिर साइकेट्रिस्ट के पास गया. मेरा दोस्त था, उसने मुझे एक दवाई लिखकर दी और कहा कि इससे मैं थोड़ा शांत रहूंगा. मैं खुद को जॉम्बी की तरह देख रहा था. चार साल तक दवाई लेता रहा, फिर अहसास हुआ कि ऐसा काम नहीं चलेगा. मैंने खुद से कहा- सुधांशु पांडे ये अंत नहीं है. तू यहां और बहुत बड़ी चीजों के लिए है. उस समय मैंने महाकाल का सहारा लिया. मैंने पूजा ज्यादा करनी शुरू की, जिससे मुझे मदद भी मिली. चार साल लगे डिप्रेशन से बाहर निकलने में. पर मेरी जिंदगी का वो बेस्ट फेज रहा. मैंने जिंदगी को अलग तरीके से देखा, लोगों की इज्जत की, लाइफ की इज्जत की. खुद के अंदर झांका. मैं एक बेहतर एक्टर बना. 

    सुधांशु ने डार्क फेज में भी किया काम
    सुधांशु ने कहा- मैंने अपनी जिंदगी के डार्क फेज में भी काम किया. मैं साल 2007 में ‘सिंह इज किंग’ की शूटिंग कर रहा था. 2 महीने के लिए ऑस्ट्रेलिया था. रणवीर शौरी भी कुछ इसी फेज से गुजर रहे थे. उन्होंने मुझे कुछ दवाई दी और कहा कि इमरजेंसी में इसको लेना. उन्होंने मेरी मदद की. 

    सुधांशु ने कहा- इस फेज में बातचीत करनी बहुत जरूरी होती है. अगर आप भी कुछ इसी फेज से गुजर रहे हैं तो बात करें, आपको बदलाव महसूस होगा. 

    —- समाप्त —-



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