More
    Home Home आरक्षण की आग से खेलतीं सुप्रिया सुले, Gen-Z से कितना मिलेगा सपोर्ट?

    आरक्षण की आग से खेलतीं सुप्रिया सुले, Gen-Z से कितना मिलेगा सपोर्ट?

    0
    49
    आरक्षण की आग से खेलतीं सुप्रिया सुले, Gen-Z से कितना मिलेगा सपोर्ट?


    जिस देश में आरक्षण का विरोध करना जनता की नजरों में ब्लास्फेमी जैसा अपराध हो वहां ओबीसी समाज से आने वाली एक महिला नेता ने ऐसा बयान दिया है जिससे भारत की राजनीतिक पार्टियों का गला सूख गया है. एक ऐसी नेता जिसकी पार्टी का मूल मराठा और ओबीसी वोटर्स के बीच से आता है, जिसके पिता देश के पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने मंडल कमीशन की रिपोर्ट अपने राज्य में लागू करने का साहस दिखाया था. महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश की ओबीसी राजनीति की धुरी माने जाने वाले विपक्ष की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने आरक्षण के खिलाफ ऐसा बयान देने का साहस दिखाया है जो न उनका परिवार कबूल करेगा और न ही उनकी पार्टी. जाहिर है कि उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक हलचल मची हुई है. लोग उन्हें या तो गाली दे रहे हैं या उनकी जय जयकार कर रहे हैं. 

    सुप्रिया एक मीडिया  हाउस के कॉन्क्लेव में भाग ले रही थीं. वहां  उन्होंने बोलते हुए आरक्षण पर एक साहसी बयान दिया, जिसपर भारतीय राजनीति में बवाल होना तय था. उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ केवल उन लोगों को मिलना चाहिए जिन्हें वास्तविक जरूरत है. शिक्षित और सक्षम परिवारों को आरक्षण मांगने में शर्मिंदगी महसूस होनी चाहिए. यह उन गरीबों के लिए है, जिन्हें शिक्षा का अवसर नहीं मिला.

    सुले ने आर्थिक आधार पर आरक्षण का समर्थन जताया, जातिगत भेदभाव को स्वीकार करते हुए कहा, जातिगत आरक्षण तब तक जरूरी है, जब तक सामाजिक भेदभाव खत्म न हो. उन्होंने क्रीमी लेयर (संपन्न वर्ग) को आरक्षण से बाहर करने पर जोर दिया और उदाहरण दिया कि मुंबई में मेरा बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़ता है, लेकिन चंद्रपुर का होनहार अवसर से वंचित है.

    सुले जिस कार्यक्रम में बोल रही थीं उन्होंने खुद वहां उपस्थित Gen Z से जानना चाहा कि जो वो कह रही हैं उससे कितने प्रतिशत लोग सहमत हैं. सुले को संतोष हुआ कि उनकी बात को सपोर्ट करने वालों में  60% Gen Z थे . सुले ने  कहा कि मैं Gen Z से जुड़ाव महसूस कर रही हूं . और आज की रात उन्हें अच्छी नींद आएगी.

    क्या सुप्रिया सुले की राजनीति को खत्म कर देगा, आरक्षण विरोधी होने का ठप्पा

    मराठा समुदाय (महाराष्ट्र की 30% आबादी) OBC श्रेणी में 10% कोटा मांग रहा है, जिसके लिए मनोज जरंगे पाटिल ने अभी कुछ दिनों पहले तक अनशन और रैलियां कर रहे थे. उनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए महायुति सरकार (BJP-NCP-Shiv Sena) ने हैदराबाद गजट लागू किया है. लेकिन मराठा असंतुष्ट हैं. सुले ने 31 अगस्त को जरंगे से मुलाकात की, जहां उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा था. उन पर बोतलें फेंकी गईं. हालांकि इसका कारण केवल यही था कि उन्होंने विशेष विधानसभा सत्र की मांग की थी. लेकिन बयान ने मराठा लॉबी को नाराज किया.

    20 सितंबर को जब सुले ने जब एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में कहा कि हमें साहसिक निर्णय लेने होंगे. आरक्षण सामाजिक न्याय का साधन है, लेकिन यह जरूरतमंदों तक सीमित हो. यह बयान ‘आरक्षण खत्म’ नहीं, बल्कि ‘सुधार’ की मांग था. क्रीमी लेयर को बाहर कर आर्थिक आधार पर फोकस करने की उनकी मांग को गलत समझा गया.

    22 सितंबर को सुले ने सफाई दी, कि मेरा बयान संविधान के खिलाफ नहीं. आरक्षण सामाजिक अन्याय को सुधारता है, लेकिन गलत लोग लाभ न लें. फिर भी, विपक्ष ने इसे ‘आरक्षण विरोधी’ करार दिया, और SC/ST/OBC संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की धमकी दी. जाहिर है कि सुले की राजनीति के डैमेज होने का खतरा मंडरा रहा है.

    महाराष्ट्र की राजनीति जाति-केंद्रित रही है. सुले का बयान NCP (SP) के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है. मराठा आंदोलनकारियों ने सुले को ‘सवर्ण समर्थक’ कहा. जरांगे ने कहा, सुले मराठा हितों की बात नहीं करतीं. मराठा वोट (30%) NCP (SP) के लिए अहम है. जाहिर है कि अभी की परिस्थितियों में वोट हो तो कम से कम चुनावों में 5-10% नुकसान संभव हो सकता है.

    क्योंकि सुले के खिलाफ OBC/SC/ST संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है. प्रकाश आंबेडकर ने कहा कहा कि आर्थिक आरक्षण OBC को कमजोर करेगा. सोशल मीडिया पर सुप्रिया सुले से माफी मांगने की डिमांड हो रही है. महाराष्ट्र कांग्रेस ने इसे ‘संविधान विरोधी’ कहा है. नाना पटोले ने कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय का आधार, आर्थिक कोटा इसे कमजोर करेगा. 

     तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया कि जातिगत न्याय को कमजोर न करें. SP ने चुप्पी साधी, लेकिन अखिलेश के करीबी ने इसे ‘सवर्ण एजेंडा’ कहा.BJP प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रिया मराठा आंदोलन को कमजोर कर रही. X पर तमाम हैंडल्स ने माफी मांगने की बात कही है. 
     
    क्या Gen Z उन्हें देशभर में हीरो बनाएगा?

    सुप्रिया ने जिस कार्यक्रम में आरक्षण के संबंध में बयान दिया उस कार्यक्रम में उपस्थित तमाम स्टूडेंट्स में करीब 60 प्रतिशत ने सुले के बयान से अपना इत्तेफाक जताया. जाहिर है सुले को यह सुनकर बहुत अच्छा लगा था. सुले यह बात अच्छी तरह जानती होंगी कि जो बयान वो दे रही हैं उससे उनका पोलिटिकल डैमेज होना तय है. पर उन्हें इस बात का भी अहसास था कि वो जो कह रही हैं उसकी समाज को बहुत जरूरत है.

     ताजा सर्च और विश्लेषण से साफ है कि तात्कालिक रूप से सुप्रिया के बयान से उन्हें जोखिम ज्यादा हैं. OBC/SC/ST और मराठा वोटरों का नुकसान होना तय है. लेकिन लंबे समय में Gen Z और सामान्य वर्ग का समर्थन उन्हें ‘सुधारवादी’ हीरो बना सकता है. 

    सुले ने जिस मंच पर कहा कि आरक्षण पर चर्चा कॉलेजों और समाज में होनी चाहिए, और वहां मौजूद युवकों ने आर्थिक आधार पर आरक्षण के पक्ष में उनका सपोर्ट किया. इसका अर्थ है कि युवा पीढ़ी पुराने तरीके से  कुछ हटकर सोच रही है, और नए न्यायसंगत तरीकों की तलाश कर रही है.

    Gen Z में मेरिट आधारित न्याय के प्रति लगाव बढ़ रहा है. सुले ने कहा है कि यह आरक्षण उन लोगों को मिलना चाहिए जिन्हें वास्तव में ज़रूरत है, और शिक्षा, अवसर की पहुंच जैसी चीज़ों में असमानताएं हैं जिनके आधार पर न्याय किया जाए.  युवा अक्सर आर्थिक अवसर, कौशल, टेक्नोलॉजी, करियर ग्रोथ आदि मामलों में संवेदनशील रहते हैं, और सक्षम अवसर चाहते हैं .इसलिए इस तरह का न्यायसंगत मॉडल उन्हें आकर्षित कर सकता है.

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Gen Z सोशल मीडिया, युवा मंच, पोल्स आदि में सक्रिय हैं, और सार्वजनिक बहसों, डेटा विश्लेषणों और सोशल मीडिया संवाद के ज़रिए अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं. जाहिर है कि यह तबका सुप्रिया को हीरो बना सकता है.

    —- समाप्त —-



    Source link

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here