अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर दबाव बनाने की रणनीति को लेकर ब्रिटेन की मैगज़ीन The Economist ने कड़ी आलोचना की है. 29 अगस्त के एडिशन में ‘India’s Next Move’ शीर्षक से छपे आर्टिकल में कहा गया है कि ट्रंप ने पाकिस्तान का पक्ष लेकर और भारत पर चीन से भी अधिक टैरिफ लगाकर “पिछले 25 साल की डिप्लोमेसी” को नुकसान पहुंचाया है. मैगजीन का कहना है कि भारत को अलग-थलग करके ट्रंप ने “बड़ी गलती” की है.
रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस समय “अपमानित, निर्दोष और एक निर्णायक परीक्षाठ तीनों स्थितियों का सामना कर रहा है. आर्टिकल में लिखा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने मई में भारत-पाकिस्तान टकराव के बाद पाकिस्तान को अपनाया और अब भारत को चीन से भी ज्यादा टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. भारत पर फिलहाल 50% टैरिफ लगाया गया है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है.
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मैगजीन का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों से ट्रंप प्रशासन ने भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर आलोचना की है. व्हाइट हाउस का कहना है कि रूसी ऑयल की खरीद से मास्को की जंग को फंडिंग मिल रही है. अमेरिकी अधिकारियों ने भारत पर यह आरोप भी लगाया है कि वह रूसी कच्चे तेल को रिफाइन करके बेचकर प्रॉफिट कमा रहा है.
ट्रेड डील पर अड़चन
भारत और अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय ट्रेड डील की बातचीत भी अटकी हुई है. भारत ने अमेरिकी कृषि और डेयरी मार्केट को खुला एक्सेस देने से इनकार किया है, जिससे ट्रंप नाराज हैं. इससे दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ गए हैं.
पाकिस्तान से नज़दीकी
इस बीच अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार भी देखने को मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने दो महीने में दो बार वॉशिंगटन का दौरा किया और ट्रंप से प्राइवेट लंच मीटिंग की. इसके बाद ट्रंप ने इस्लामाबाद के साथ क्रिप्टोकरेंसी पार्टनरशिप और ऑयल रिजर्व डेवलपमेंट का ऐलान भी किया.
द इकॉनॉमिस्ट की चेतावनी
The Economist ने लिखा कि भारत को अलग-थलग करना अमेरिका की “बड़ी गलती” है. भारत के लिए यह मौका भी है कि वह अपने “सुपर पॉवर-इन-वेटिंग” होने के दावे को साबित करे. आर्टिकल के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी को ट्रंप के साथ रिश्तों में नुकसान को सीमित करने की कोशिश करनी चाहिए.
भारत का जवाब और आगे की रणनीति
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया है और ब्रिक्स और एससीओ जैसे मल्टीलेटरल फोरम्स में अपनी भागीदारी बढ़ा दी है. द इकॉनॉमिस्ट ने लिखा कि शायद ट्रंप ने यह नहीं सोचा कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकॉनॉमी कैसे रिएक्ट करेगी.
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मैगजीन ने लिखा, “नरेंद्र मोदी का चीन में शी जिनपिंग से मिलना सही है. आने वाले दशक में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भारत को अमेरिका की टेक्नोलॉजी के साथ-साथ चीन से भी ट्रेड लिंक मजबूत करने होंगे. साथ ही नई ट्रेड डील्स की तलाश करनी होगी.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में एससीओ लीडर्स समिट में शामिल होंगे. इस यात्रा को भारत-चीन रिश्तों को रीसेट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
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